Khabarilaal News Desk :

दिल्ली के मोहन नगर क्षेत्र से सामने आए एक IVF विवाद ने चिकित्सा जगत और कानूनी विशेषज्ञों के बीच गंभीर चर्चा छेड़ दी है। एक दंपती ने आरोप लगाया है कि IVF प्रक्रिया के माध्यम से जन्मी उनकी जुड़वां बेटियों का DNA न तो मां से और न ही पिता से मेल खाता है। मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है और परिवार न्याय की मांग कर रहा है।

DNA रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

रिपोर्ट के अनुसार, संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपती ने एक IVF क्लिनिक की सहायता से उपचार कराया था। उपचार के बाद जुड़वां बेटियों का जन्म हुआ। समय बीतने के साथ बच्चियों की शारीरिक बनावट और विशेषताओं को लेकर परिवार को संदेह हुआ।

बाद में कराई गई DNA जांच में कथित तौर पर सामने आया कि बच्चियों का जैविक संबंध माता-पिता दोनों से मेल नहीं खा रहा है। इसके बाद परिवार ने IVF प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और संभावित नमूना अदला-बदली का आरोप लगाया।

IVF में गड़बड़ी होने पर क्या कहता है कानून?

भारत में IVF और सहायक प्रजनन तकनीकों को नियंत्रित करने के लिए Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 तथा Surrogacy (Regulation) Act, 2021 लागू हैं।

इन कानूनों के तहत IVF क्लिनिक और ART केंद्रों पर कई जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • भ्रूण, शुक्राणु और अंडाणु के नमूनों का सुरक्षित संरक्षण
  • मरीजों की स्पष्ट सहमति लेना
  • रिकॉर्ड का सही रखरखाव
  • प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना

यदि नमूनों की अदला-बदली या रिकॉर्ड में गड़बड़ी साबित होती है तो संबंधित क्लिनिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

करोड़ों के मुआवजे का बन सकता है आधार

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में प्रभावित परिवार निम्न आधारों पर दावा कर सकता है—

  • मेडिकल नेग्लिजेंस (चिकित्सीय लापरवाही)
  • उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत मुआवजा
  • अनुबंध के उल्लंघन का दावा
  • मानसिक एवं भावनात्मक क्षति का दावा

यदि जानबूझकर या गंभीर लापरवाही साबित होती है तो आपराधिक कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है।

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

साल 2023 में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने एक मामले में IVF प्रक्रिया के दौरान शुक्राणु नमूनों की गड़बड़ी को गंभीर चिकित्सीय लापरवाही माना था।

उस मामले में आयोग ने संबंधित अस्पताल और चिकित्सकों को लगभग 1.3 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया था।

अदालत से न्याय की उम्मीद

दिल्ली का यह मामला अब साकेत कोर्ट में विचाराधीन है। परिवार ने अदालत से मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि DNA रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर IVF प्रक्रिया में गड़बड़ी सिद्ध होती है तो यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा लापरवाही मामलों में से एक बन सकता है।

जैविक पहचान जानना भी है अधिकार

सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि व्यक्ति को अपनी जैविक पहचान जानने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे मामलों में DNA परीक्षण को न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण साधन माना गया है।

अब सभी की नजर अदालत की सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने ला सकती है।

DESK REPORTER – CHANDAN KUMAR

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