Khabarilaal News Desk :

डिजिटल युग में सोशल मीडिया, यूट्यूब, व्हाट्सएप और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लोगों की अभिव्यक्ति का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। लेकिन कई बार इन्हीं माध्यमों का उपयोग किसी व्यक्ति की छवि खराब करने, झूठे आरोप लगाने और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए भी किया जाता है। ऐसे मामलों में भारतीय कानून पीड़ित व्यक्ति को न्याय प्राप्त करने का अधिकार देता है।

क्या होती है मानहानि?

जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में झूठा आरोप, टिप्पणी, लेख, वीडियो, पोस्ट, संदेश या अन्य सामग्री प्रकाशित करता है, जिससे उसकी सामाजिक, व्यक्तिगत या पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे, तो इसे मानहानि माना जा सकता है।

मानहानि निम्न माध्यमों से हो सकती है—

  • सोशल मीडिया पोस्ट

  • व्हाट्सएप संदेश

  • यूट्यूब वीडियो

  • समाचार लेख

  • सार्वजनिक भाषण

  • ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग

  • संकेत, चित्र या अन्य डिजिटल सामग्री

हालांकि, हर आलोचना मानहानि नहीं होती। यदि कोई टिप्पणी सार्वजनिक हित में और तथ्यों के आधार पर की गई हो, तो उसे मानहानि नहीं माना जाएगा।

नए कानून में क्या है प्रावधान?

भारत में पहले मानहानि के प्रावधान भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 और 500 के तहत थे। लेकिन 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 में इन प्रावधानों को शामिल किया गया है।

अब मानहानि से संबंधित अपराध BNS की धारा 356 के तहत परिभाषित किया गया है। यह प्रावधान किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले झूठे आरोपों और बयानों के खिलाफ कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

मानहानि साबित करने के लिए कौन से सबूत जरूरी हैं?

किसी भी मानहानि के मुकदमे में अदालत सबूतों को सबसे अधिक महत्व देती है। इसलिए पीड़ित व्यक्ति को यह साबित करना होता है कि उसके खिलाफ झूठी और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री प्रकाशित की गई है।

महत्वपूर्ण सबूतों में शामिल हैं—

  • सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट

  • व्हाट्सएप चैट

  • वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग

  • ईमेल या लिखित पत्र

  • समाचार पत्र की कटिंग

  • प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान

मानहानि का मुकदमा कैसे दायर किया जाता है?

मानहानि के मामले में सामान्यतः निम्न प्रक्रिया अपनाई जाती है—

1. कानूनी नोटिस भेजना

सबसे पहले आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा जाता है, जिसमें झूठे आरोप वापस लेने, पोस्ट हटाने या सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की जाती है।

2. आपराधिक शिकायत दर्ज करना

यदि नोटिस के बाद भी मामला नहीं सुलझता, तो संबंधित क्षेत्र के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दाखिल की जा सकती है।

3. हर्जाने के लिए सिविल मुकदमा

यदि प्रतिष्ठा को आर्थिक या सामाजिक नुकसान पहुंचा है, तो पीड़ित व्यक्ति सिविल कोर्ट में हर्जाने की मांग भी कर सकता है।

4. दोनों कार्रवाई एक साथ संभव

गंभीर मामलों में आपराधिक और सिविल दोनों तरह की कार्रवाई एक साथ की जा सकती है।

सोशल मीडिया के दौर में बढ़े हैं ऐसे मामले

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के साथ मानहानि के मामलों में भी तेजी आई है। कई बार बिना तथ्यों की जांच किए पोस्ट, वीडियो या संदेश वायरल कर दिए जाते हैं, जिससे किसी व्यक्ति की छवि को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

कानून आपकी प्रतिष्ठा की रक्षा करता है

भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत प्रतिष्ठा और सम्मान की सुरक्षा को महत्व दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर झूठे आरोप लगाकर या सोशल मीडिया के माध्यम से आपकी छवि खराब करता है, तो आप कानूनी नोटिस, सिविल दावा और आपराधिक शिकायत के जरिए न्याय प्राप्त कर सकते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाना सबसे प्रभावी और सुरक्षित विकल्प है।

DESK REPORTER – CHANDAN KUMAR

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