Khabarilaal News Desk

नई दिल्ली। हरियाणा की चर्चित गायिका और अभिनेत्री Sapna Choudhary द्वारा अपने पति Veer Sahu के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराने के बाद यह विषय एक बार फिर चर्चा में है। मामला केवल एक चर्चित दंपत्ति के विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को घरेलू हिंसा से मिलने वाले कानूनी संरक्षण और अधिकारों को समझने का अवसर भी प्रदान करता है।

क्या हैं सपना चौधरी के आरोप?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सपना चौधरी ने दिल्ली की द्वारका अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि उनके पति द्वारा कई बार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी गई। उन्होंने अदालत से सुरक्षा और कानूनी संरक्षण की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी और अदालत तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

क्या है घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005?

भारत में महिलाओं की सुरक्षा के लिए Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 लागू है। इस कानून का उद्देश्य महिलाओं को घरेलू हिंसा से तत्काल राहत और संरक्षण प्रदान करना है।

घरेलू हिंसा में क्या-क्या शामिल है?

इस कानून के तहत केवल मारपीट ही नहीं, बल्कि निम्न प्रकार की प्रताड़ना भी घरेलू हिंसा मानी जाती है—

  • शारीरिक हिंसा

  • मानसिक उत्पीड़न

  • भावनात्मक प्रताड़ना

  • यौन शोषण

  • आर्थिक शोषण

  • धमकी या डराना

महिलाओं को मिलते हैं ये अधिकार

घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पीड़ित महिला को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं—

साझा घर में रहने का अधिकार

महिला को वैवाहिक या साझा आवास से मनमाने तरीके से नहीं निकाला जा सकता।

संरक्षण आदेश

अदालत आरोपी को महिला से संपर्क करने, धमकाने या हिंसा करने से रोक सकती है।

आर्थिक सहायता

महिला को भरण-पोषण, चिकित्सा खर्च और अन्य वित्तीय सहायता दिलाई जा सकती है।

बच्चों की अभिरक्षा

जरूरत पड़ने पर अदालत बच्चों की अस्थायी कस्टडी महिला को दे सकती है।

अंतरिम राहत

अंतिम फैसला आने से पहले भी अदालत महिला की सुरक्षा के लिए तत्काल आदेश जारी कर सकती है।

दोष साबित होने पर क्या हो सकती है सजा?

घरेलू हिंसा अधिनियम मुख्य रूप से पीड़िता को सुरक्षा और राहत देने वाला कानून है। हालांकि यदि अदालत द्वारा जारी आदेशों का उल्लंघन किया जाता है तो यह दंडनीय अपराध बन जाता है।

ऐसी स्थिति में आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है और कानून के तहत कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान भी है। इसके अलावा यदि मारपीट, चोट पहुंचाने या अन्य गंभीर आरोप साबित होते हैं तो भारतीय दंड कानूनों की संबंधित धाराएं भी लागू हो सकती हैं।

क्या घरेलू हिंसा का मामला सीधे तलाक दिला देता है?

नहीं। घरेलू हिंसा और तलाक दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।

  • घरेलू हिंसा कानून सुरक्षा और राहत प्रदान करता है।

  • तलाक की प्रक्रिया विवाह संबंधी अलग कानूनों के तहत चलती है।

हालांकि यदि हिंसा और प्रताड़ना के आरोप गंभीर साबित होते हैं तो वे बाद में तलाक के लिए मजबूत आधार बन सकते हैं।

अदालत की भूमिका अहम

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू हिंसा कानून का मूल उद्देश्य महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और स्वतंत्रता की रक्षा करना है। अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अंतरिम राहत, सुरक्षा आदेश और अन्य कानूनी सहायता प्रदान कर सकती है।

DESK REPORTER – CHANDAN KUMAR

Link Copied to Clipboard!

Comments (0)

4 + 5 = ?
No comments yet. Be the first to share your thoughts!