Khabarilaal News Desk :
भारतीय सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती का इतिहास बेहद पुराना और गौरवशाली रहा है। ब्रिटिश काल से लेकर आजादी के बाद तक गोरखा रेजिमेंट ने कई युद्धों में अपनी बहादुरी और पराक्रम का लोहा मनवाया है।
200 साल पुराना इतिहास

गोरखा सैनिकों की बहादुरी को पहली बार 1814-1816 के एंग्लो-नेपाली युद्ध के दौरान पहचाना गया था। इसके बाद उन्हें ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल किया गया। तब से लेकर अब तक गोरखा सैनिक लगभग 200 वर्षों से अधिक समय से युद्धों और सैन्य अभियानों का हिस्सा रहे हैं।
आजादी के बाद रेजिमेंट का विभाजन
1947 में भारत की आजादी के बाद भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के तहत 10 गोरखा रेजिमेंटों में से 6 भारत को मिलीं, जबकि 4 ब्रिटिश सेना में चली गईं। बाद में ब्रिटिश यूनिट्स को मिलाकर ‘रॉयल गोरखा राइफल्स’ बनाई गई।
भारतीय सेना में गोरखा रेजिमेंट
भारतीय सेना में वर्तमान में 1, 3, 4, 5, 8, 9 और 11 गोरखा राइफल्स सक्रिय हैं। इन यूनिट्स में अधिकांश सैनिक नेपाल से भर्ती किए जाते हैं। प्रत्येक रेजिमेंट में कई बटालियन होती हैं और इन्हें युद्ध के मैदान में अत्यंत बहादुर माना जाता है।
विश्व युद्धों में योगदान
गोरखा सैनिकों ने प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध सहित कई अंतरराष्ट्रीय अभियानों में हिस्सा लिया और अपनी अद्भुत वीरता का परिचय दिया।
भर्ती को लेकर नेपाल का विरोध
हाल के वर्षों में भारत और नेपाल के बीच गोरखा भर्ती को लेकर मतभेद देखने को मिले हैं। नेपाल सरकार का मानना है कि चार साल की अग्निवीर जैसी सेवा गोरखा परंपरा के अनुरूप नहीं है। इसी कारण 2020 के बाद से नई भर्ती पर अस्थायी रोक जैसी स्थिति बनी हुई है।
भविष्य पर असर
वर्तमान में भारतीय सेना में लगभग 30,000 नेपाली गोरखा सैनिक सेवारत हैं, लेकिन नई भर्ती बंद रहने से भविष्य में इनकी संख्या कम होने की आशंका जताई जा रही है। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत जारी है।
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