Khabarilaal News Desk :
भारत-बांग्लादेश सीमा पर पिछले तीन दिनों से जारी हाई-वोल्टेज ड्रामा आखिरकार समाप्त हो गया। लगभग 69 घंटे तक नो मैन्स लैंड में फंसे 10 लोगों को सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने वापस अपने क्षेत्र में बुला लिया। बताया जा रहा है कि इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
बांग्लादेश ने सीमा में प्रवेश देने से किया इनकार
मामला पंचगढ़ सदर उपजिला के बोरोबारी-प्रधानपारा बॉर्डर का है, जहां 10 लोगों को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। भारतीय पक्ष का कहना था कि ये बांग्लादेशी नागरिक हैं, जबकि बांग्लादेश ने उन्हें अपनी सीमा में प्रवेश देने से इनकार कर दिया।
इसके बाद ये सभी लोग भारत-बांग्लादेश सीमा के बीच स्थित नो मैन्स लैंड में फंस गए और करीब 69 घंटे तक वहीं रहने को मजबूर रहे।
बारिश, धूप और कठिन परिस्थितियों में गुजारे तीन दिन
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, ये लोग जीरो लाइन के पास एक संकरी मेड़ पर फंसे रहे। इस दौरान उन्हें तेज धूप, बारिश और खराब मौसम का सामना करना पड़ा। चारों ओर पानी भर जाने के कारण उनकी स्थिति और भी कठिन हो गई थी।
कई दौर की फ्लैग मीटिंग भी बेनतीजा
विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। शनिवार को बीएसएफ और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के अधिकारियों के बीच बटालियन कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
इससे पहले कंपनी कमांडर स्तर पर भी बातचीत हुई थी, लेकिन दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम रहे।
देर रात BSF ने वापस बुलाया
रिपोर्ट के मुताबिक रविवार देर रात हल्की बारिश के दौरान BSF के जवान मौके पर पहुंचे और सभी 10 लोगों को वापस भारतीय क्षेत्र में ले आए। बताया जा रहा है कि यह कदम मानवीय आधार पर उठाया गया।
सीमा प्रबंधन को लेकर फिर उठे सवाल
इस घटना ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ, नागरिकता सत्यापन और सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। साथ ही दोनों देशों के बीच ऐसे मामलों में बेहतर समन्वय की आवश्यकता भी सामने आई है।
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