Khabrilaal News Desk :
बांग्लादेश ने तीस्ता नदी मेगा प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर चीन की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने बीजिंग दौरे के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात कर तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना में चीन की भागीदारी का औपचारिक अनुरोध किया है। इस कदम को भारत के लिए रणनीतिक चिंता के तौर पर देखा जा रहा है।
चीन से समर्थन मांगने पहुंचा बांग्लादेश
विदेश मंत्री बनने के बाद अपनी पहली चीन यात्रा पर पहुंचे खलीलुर रहमान ने चीन से तीस्ता परियोजना में सहयोग और निवेश की मांग की। दोनों देशों के बीच जारी संयुक्त बयान में भी इस प्रोजेक्ट का जिक्र किया गया।
भारत ने भी दिखाई थी बातचीत की इच्छा
दिलचस्प बात यह है कि इसी सप्ताह भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा था कि भारत तीस्ता प्रोजेक्ट पर बांग्लादेश के साथ बातचीत के लिए तैयार है। भारत पहले ही इस परियोजना को लेकर अपना प्रस्ताव ढाका को दे चुका है। इसके बावजूद बांग्लादेश का चीन की ओर झुकाव नई दिल्ली के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
मोहम्मद यूनुस की नीति पर आगे बढ़ रही BNP
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की नई BNP सरकार पूर्व अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस की चीन समर्थक कूटनीतिक नीति को आगे बढ़ा रही है। मार्च 2025 में यूनुस ने चीन दौरे के दौरान तीस्ता प्रोजेक्ट में चीन की भूमिका का स्वागत किया था। इसके बाद BNP नेताओं ने भी सत्ता में आने पर चीन के प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने के संकेत दिए थे।
भारत को क्यों है आपत्ति?
भारत लंबे समय से तीस्ता परियोजना में चीन की भागीदारी का विरोध करता रहा है। नई दिल्ली का मानना है कि इससे दक्षिण एशिया में चीन का रणनीतिक प्रभाव और बढ़ेगा। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल बंटवारा समझौता पिछले 15 वर्षों से लंबित है।
क्या है तीस्ता मेगा प्रोजेक्ट?
करीब 1 अरब डॉलर की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में नदी के पानी का संरक्षण, डैम निर्माण, नदी की गहराई बढ़ाना और किनारों पर तटबंध एवं सड़क निर्माण शामिल है। बांग्लादेश ने इस परियोजना के लिए चीन से लगभग 72.5 करोड़ डॉलर का सॉफ्ट लोन भी मांगा है।
शेख हसीना सरकार ने भारत को दिया था प्राथमिकता
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2024 में कहा था कि चीन परियोजना लेने को तैयार था, लेकिन वह चाहती थीं कि भारत इस प्रोजेक्ट को संभाले। हालांकि बाद में बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं और अब नई सरकार फिर चीन की ओर झुकती दिखाई दे रही है।
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