वाराणसी। मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स का उद्घाटन सोमवार को हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि 21वीं सदी में उच्च शिक्षा केवल डिग्री प्रदान करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सशक्तिकरण, समानता और ज्ञान आधारित समावेशी समाज के निर्माण का आधार है। समावेशन केवल भौतिक पहुंच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शैक्षणिक सहभागिता, सामाजिक स्वीकार्यता और भावनात्मक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के प्रो. योगेन्द्र नाथ पाण्डेय ने कहा कि पाठ्यक्रम को लचीला, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और शिक्षार्थी-केन्द्रित होना चाहिए। शिक्षकों को विविध शिक्षण विधियों का प्रयोग करना चाहिए।
वही द्वितीय सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के प्रो. मुनेश कुमार ने कहा कि समावेशी उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक है कि संस्थानों में संवेदनशीलता, सम्मान, सहानुभूति और सहयोग की संस्कृति विकसित की जाए।
स्वागत करते हुए मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को चाहिए कि वे वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए प्रवेश, छात्रवृत्ति और आधारभूत सुविधाओं में समानता सुनिश्चित करें। संचालन प्रोजेक्ट असिस्टेंट डॉ. विनय सिंह, तकनीकी सहयोग सारिका व सरस्वती एवं धन्यवाद ज्ञापन अनुपम मिश्रा व दीपशिखा ने किया।

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