Khabarilaal News Desk :
वैज्ञानिकों ने दुनिया को चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में एक संभावित “सुपर अल नीनो” तेजी से विकसित हो रहा है, जिसके जुलाई 2026 तक बनने की लगभग 80 प्रतिशत संभावना जताई गई है। इस घटना से वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और मौसम पैटर्न में बड़े बदलाव की आशंका है।
NOAA ने जारी किया अलर्ट
यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र का तापमान लगातार बढ़ रहा है और सतह के नीचे असामान्य रूप से गर्म पानी का विशाल भंडार जमा हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति आने वाले महीनों में अल नीनो को और अधिक मजबूत बना सकती है।
2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है तापमान
कई मौसम एजेंसियों का अनुमान है कि इस साल के अंत तक प्रशांत महासागर का तापमान औसत से 2.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ सकता है। अगर यह स्थिति बनी रहती है तो यह “सुपर अल नीनो” की श्रेणी में आ सकता है, जो वैश्विक जलवायु के लिए बेहद गंभीर माना जाता है।
वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी
यूके मेट ऑफिस के विशेषज्ञ एडम स्केफ के अनुसार, यह अल नीनो अब तक के सबसे शक्तिशाली जलवायु घटनाओं में से एक हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हवाओं (ट्रेड विंड्स) में बदलाव इसकी गति को कभी तेज तो कभी धीमा कर सकता है, जिससे इसका पूर्वानुमान लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
दुनिया भर में मौसम पर असर
अल नीनो के प्रभाव से दुनिया के कई हिस्सों में मौसम में भारी बदलाव देखने को मिल सकता है। इसमें अमेजन, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में सूखा, भारतीय मानसून में बाधा और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बारिश के पैटर्न में बदलाव शामिल हैं।
2027 में रिकॉर्ड गर्मी की आशंका
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सुपर अल नीनो विकसित होता है तो 2026 और 2027 में वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड तोड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में 1998, 2016, 2023 और 2024 जैसे गर्म साल भी अल नीनो से जुड़े रहे हैं।
वैज्ञानिकों की अंतिम चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र और वायुमंडल के बीच संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे अल नीनो जैसी घटनाएं और भी अधिक तीव्र हो सकती हैं। फिलहाल वैज्ञानिक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, लेकिन इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
Comments (0)