Khabarilaal News Desk :

एशिया की बदलती भू-राजनीति के बीच जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची अगले महीने भारत दौरे पर आने वाली हैं। चीन के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए पहचानी जाने वाली ताकाइची प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ असम में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। इस मुलाकात को चीन की बढ़ती आक्रामकता के खिलाफ दोनों देशों की साझा रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

असम में होगा भारत-जापान शिखर सम्मेलन

रिपोर्ट्स के अनुसार जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची जुलाई के पहले सप्ताह में भारत पहुंच सकती हैं। असम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी उच्चस्तरीय वार्ता प्रस्तावित है। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, औद्योगिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और रक्षा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

ताकाइची के साथ करीब 50 जापानी उद्योगपति और कारोबारी प्रतिनिधि भी भारत आएंगे। इनमें सुजुकी मोटर, टोयोटा समूह और जापान की प्रमुख ट्रेडिंग कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

पहली बार भारत आ रही हैं सनाए ताकाइची

प्रधानमंत्री बनने के बाद यह सनाए ताकाइची का पहला भारत दौरा होगा। हालांकि इससे पहले वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दक्षिण अफ्रीका में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन और हाल ही में फ्रांस में हुए G7 सम्मेलन के दौरान मुलाकात कर चुकी हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी पहले संकेत दे चुके हैं कि भारत-जापान समिट का आयोजन राज्य में किया जा सकता है।

चीन के खिलाफ सबसे सख्त नेताओं में गिनी जाती हैं ताकाइची

सनाए ताकाइची को जापान की राजनीति में सबसे मजबूत राष्ट्रवादी नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद जापान की सैन्य क्षमता बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

उनकी सरकार चीन को जापान के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा मानती है। यही वजह है कि भारत और जापान के बीच सुरक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए भारत और जापान की साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सकती है।

रक्षा सहयोग पर होगा बड़ा फोकस

सूत्रों के मुताबिक ताकाइची अपने भारत दौरे के दौरान रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रस्ताव रख सकती हैं।

जापान भारत को अत्याधुनिक मोगामी क्लास युद्धपोत की पेशकश कर सकता है। यह जापानी नौसेना के सबसे आधुनिक युद्धपोतों में से एक माना जाता है।

जापान चाहता है कि भारत ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तकनीकी हस्तांतरण (Transfer of Technology) के माध्यम से इन युद्धपोतों का निर्माण करे। साथ ही जापान इन जहाजों को भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल प्रणाली के अनुरूप बनाने के लिए आवश्यक बदलाव करने को भी तैयार बताया जा रहा है।

भारतीय नौसेना को मिल सकती है बड़ी ताकत

यदि मोगामी क्लास युद्धपोत और तकनीकी सहयोग से जुड़ा समझौता आगे बढ़ता है तो इससे भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों को देखते हुए भारत-जापान रक्षा साझेदारी क्षेत्रीय संतुलन में अहम भूमिका निभा सकती है।

भारत-जापान संबंधों को मिलेगा नया आयाम

पिछले दो दशकों में भारत और जापान के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश रक्षा अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, तकनीकी सहयोग, इंटेलिजेंस शेयरिंग और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।

सनाए ताकाइची का यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। साथ ही यह संदेश भी देगा कि एशिया में चीन की बढ़ती ताकत के मुकाबले लोकतांत्रिक देशों का सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।

BUREAU : CHANDAN KUMAR

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