Khabarilaal News Desk :
पेरिस। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने वैश्विक रणनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि क्षेत्र के अन्य देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, तो ईरान को इससे वंचित रखना उचित नहीं होगा।
G7 सम्मेलन में ट्रंप ने दिया चौंकाने वाला संदेश
फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान को कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें रखने की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सऊदी अरब और कतर जैसे देशों के पास ऐसी मिसाइलें मौजूद हैं, तो ईरान को पूरी तरह रोकना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
सऊदी अरब और कतर का उदाहरण देकर रखा पक्ष
ट्रंप ने कहा कि कुछ लोग सऊदी अरब को मिसाइल रखने की अनुमति देते हैं, लेकिन ईरान को नहीं। उनके अनुसार ऐसा दृष्टिकोण संतुलित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के संदर्भ में ईरान के पास सीमित मिसाइल क्षमता होना असामान्य नहीं माना जाना चाहिए।
परमाणु हथियारों और मिसाइलों में बताया बड़ा अंतर
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना परमाणु हथियारों से करते हुए कहा कि मिसाइलें स्थानीय स्तर पर नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन वे पूरी दुनिया को तबाह करने वाली परमाणु क्षमता जैसी नहीं होतीं। ट्रंप के मुताबिक वास्तविक चिंता परमाणु हथियारों को लेकर होनी चाहिए, न कि केवल मिसाइल कार्यक्रम को लेकर।
इजरायल की रणनीति पर पड़ सकता है असर
ट्रंप का यह बयान इजरायल के लिए झटके के रूप में देखा जा रहा है। इजरायल लंबे समय से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताता रहा है। इजरायली नेतृत्व का मानना रहा है कि ईरान अपनी मिसाइल क्षमता का उपयोग रणनीतिक दबाव बनाने और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को सुरक्षित रखने के लिए करता है।
अमेरिका-ईरान समझौते में मिसाइल मुद्दा नहीं बना बाधा
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए समझौते में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को प्रमुख मुद्दे के रूप में शामिल नहीं किया गया, लेकिन ट्रंप की टिप्पणी से संकेत मिलते हैं कि वॉशिंगटन इस विषय पर पहले की तुलना में अधिक लचीला रुख अपना सकता है।
समझौता ज्ञापन पर दोनों देशों ने किए हस्ताक्षर
ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों बाद यह जानकारी सामने आई कि अमेरिका और Iran के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर औपचारिक हस्ताक्षर पूरे हो गए हैं। अमेरिकी पक्ष से ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय में दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए, जबकि ईरानी पक्ष से राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इसे मंजूरी दी।
क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरणों के संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल मिसाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्य पूर्व में बदलती अमेरिकी रणनीति का संकेत भी हो सकता है। यदि अमेरिका ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर नरम रुख अपनाता है, तो इसका प्रभाव इजरायल, खाड़ी देशों और पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
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