Khabarilaal News Desk :
नई दिल्ली। आंधी-बारिश के मौसम में अक्सर लोग अपनी गाड़ियां पेड़ों के नीचे खड़ी कर देते हैं या बारिश से बचने के लिए वाहन को किसी बड़े पेड़ की छांव में रोक लेते हैं। लेकिन अगर ऐसी स्थिति में पेड़ या उसकी शाखा वाहन पर गिर जाए, तो हर बार उसे मोटर वाहन दुर्घटना (Motor Accident) नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यही स्पष्ट किया है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2007 का है। बेंगलुरु निवासी के.के. उमेश कुमार ऑटो-रिक्शा से यात्रा कर रहे थे। रास्ते में तेज बारिश शुरू होने पर ऑटो चालक ने वाहन को सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे रोक दिया।
इसी दौरान पेड़ की एक बड़ी शाखा टूटकर ऑटो पर गिर गई।
इस हादसे में:
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यात्री गंभीर रूप से घायल हो गया
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रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई
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दोनों पैरों में स्थायी पक्षाघात (Paralysis) हो गया
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जीवनभर के लिए शारीरिक विकलांगता का सामना करना पड़ा
मुआवजे को लेकर शुरू हुई कानूनी लड़ाई
पीड़ित ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे की मांग करते हुए दावा दायर किया।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने:
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BBMP (बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका)
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बीमा कंपनी
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बागवानी विभाग
इन सभी पर मुआवजे की जिम्मेदारी तय की थी।
लेकिन BBMP ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति संजय करोल और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि:
मोटर वाहन अधिनियम के तहत दावा तभी बनता है जब दुर्घटना और वाहन के उपयोग के बीच सीधा एवं निकट संबंध हो।
अदालत ने कहा कि इस मामले में दुर्घटना का कारण वाहन नहीं था, बल्कि पेड़ की शाखा का टूटना था।
कोर्ट ने दिया अहम उदाहरण
सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
यदि वही व्यक्ति ऑटो में बैठने के बजाय बारिश से बचने के लिए पैदल पेड़ के नीचे खड़ा होता और शाखा उसके ऊपर गिरती, तो परिणाम वही होता।
इसलिए:
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वाहन दुर्घटना का सक्रिय कारण नहीं था
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वाहन केवल वह स्थान था जहां व्यक्ति मौजूद था
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ऐसे में इसे मोटर वाहन दुर्घटना नहीं माना जा सकता
'Act of God' का भी जिक्र
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में Act of God (प्राकृतिक घटना) के सिद्धांत का भी उल्लेख किया।
अदालत ने माना कि:
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नगर निकायों की जिम्मेदारी पेड़ों की देखरेख करना है
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लेकिन हर पेड़ और उसकी हर शाखा की लगातार निगरानी करना व्यावहारिक नहीं है
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केवल शाखा टूट जाने मात्र से नगर निगम स्वतः दोषी नहीं ठहराया जा सकता
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने BBMP को जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया।
फिर भी पीड़ित को मिला राहत
हालांकि कानूनी प्रश्न BBMP के पक्ष में तय हुआ, लेकिन अदालत ने पीड़ित की गंभीर स्थिति को देखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने:
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संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग किया
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मुआवजे की राशि 17.10 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी
अदालत ने कहा कि पीड़ित को एक और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
फैसले का क्या होगा असर?
इस फैसले के बाद भविष्य में:
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वाहन पर पेड़ गिरने की हर घटना को मोटर वाहन दुर्घटना नहीं माना जाएगा
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MACT (Motor Accident Claims Tribunal) में दावा तभी स्वीकार होगा जब वाहन दुर्घटना का प्रत्यक्ष कारण हो
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केवल वाहन में मौजूद होने से मोटर एक्सीडेंट का दावा स्वतः नहीं बन जाएगा
खबरीलाल निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने मोटर वाहन दुर्घटना दावों की कानूनी सीमा को स्पष्ट कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि वाहन पर पेड़ गिरने जैसी बाहरी और प्राकृतिक घटनाओं को हर बार सड़क दुर्घटना नहीं माना जा सकता। हालांकि साथ ही कोर्ट ने यह भी दिखाया कि गंभीर मानवीय परिस्थितियों में न्याय सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक शक्तियों का उपयोग किया जा सकता है।
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