Khabarilaal News Desk :
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता अब एक व्यापक समझौते के करीब पहुंच गई है। ट्रंप के मुताबिक, इस संभावित डील में होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को फिर से खोलने की प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है। हालांकि, ईरान ने इस दावे पर अलग रुख अपनाया है और कहा है कि जलडमरूमध्य पर नियंत्रण उसका ही रहेगा।
ट्रंप बोले- समझौता लगभग तय
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि अमेरिका, ईरान और कई अन्य देशों के बीच एक बड़े समझौते की रूपरेखा काफी हद तक तैयार हो चुकी है। उन्होंने बताया कि अब केवल अंतिम औपचारिक प्रक्रिया बाकी है।
बताया गया कि ट्रंप ने इस मुद्दे पर खाड़ी देशों सहित कई नेताओं से बातचीत की है। इसके अलावा इजरायल के प्रधानमंत्री से भी अलग से चर्चा हुई।
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की चर्चा
रिपोर्टों के अनुसार, जिस प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है, उसके लागू होने के बाद ईरान के साथ तनाव कम हो सकता है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों को धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लाने पर भी विचार हो रहा है।
यह भी कहा गया कि ईरानी बंदरगाहों के आसपास लागू कुछ प्रतिबंधों और सैन्य निगरानी में ढील दी जा सकती है।
ईरान ने ट्रंप के दावे को बताया गलत
ईरान के सरकारी मीडिया ने ट्रंप के बयान पर आपत्ति जताई है। ईरानी पक्ष का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण ईरान के पास ही रहेगा और प्रस्तावित बदलावों का मतलब यह नहीं है कि पहले जैसी पूरी स्वतंत्र आवाजाही बहाल होगी।
ईरान का दावा है कि जहाजों की संख्या सामान्य स्तर के करीब लाई जा सकती है, लेकिन रणनीतिक नियंत्रण नहीं छोड़ा जाएगा।
इस सप्ताह कई बार बदले संकेत
ट्रंप ने इसी सप्ताह ईरान को चेतावनी दी थी कि समझौते के लिए समय सीमित है। बाद में उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्रीय देशों के आग्रह पर कुछ सख्त कदमों को फिलहाल टाल दिया गया।
पाकिस्तान आर्मी चीफ के ईरान दौरे के बाद बढ़ी चर्चा
इन घटनाक्रमों के बीच पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का ईरान दौरा भी चर्चा में रहा। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित समझौतों पर बातचीत हुई है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव या समझौता अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान की ओर से सामने आए दावों में अंतर दिखाई दे रहा है। ऐसे में अंतिम समझौते और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार बना हुआ है।
Comments (0)