Khabarilaal News Desk :

सुल्तानपुर/नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर अपने पुराने बयान को लेकर कानूनी चर्चा के केंद्र में हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में सुल्तानपुर की MP-MLA कोर्ट में अगली सुनवाई 29 जून को प्रस्तावित है। करीब सात वर्षों से चल रहे इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिया गया एक बयान आज भी राहुल गांधी का पीछा नहीं छोड़ रहा। मामले की सुनवाई अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां अदालत की अगली कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी। चुनाव प्रचार के बीच आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

इस बयान को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने सुल्तानपुर की MP-MLA कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी के बयान से अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचा और भाजपा कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुईं।

मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने परिवाद स्वीकार करते हुए मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ाने का आदेश दिया था।

अदालत में पेश हो चुके हैं राहुल गांधी

इस चर्चित मामले में राहुल गांधी पहले भी अदालत में पेश हो चुके हैं।

फरवरी 2024 में उन्होंने अदालत से जमानत ली थी। इसके बाद जुलाई 2024 में उनका बयान दर्ज किया गया, जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए पूरे मामले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया।

फरवरी 2026 में राहुल गांधी स्वयं सुल्तानपुर स्थित MP-MLA कोर्ट पहुंचे थे और न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा था। उनकी अदालत में मौजूदगी के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया था।

वॉयस सैंपल को लेकर भी हुआ था विवाद

मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने राहुल गांधी के वॉयस सैंपल की जांच कराने की मांग भी उठाई थी।

शिकायतकर्ता का तर्क था कि कथित बयान से जुड़े ऑडियो साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि बयान की पुष्टि हो सके।

हालांकि अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता पक्ष ने उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही, जिसके चलते मामले की सुनवाई में कुछ समय का विलंब भी हुआ।

क्यों अहम है 29 जून की सुनवाई?

अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 जून को होनी है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह सुनवाई मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अदालत शिकायतकर्ता और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करते हुए आगामी प्रक्रिया को लेकर निर्णय ले सकती है।

यही वजह है कि राजनीतिक दलों, कानूनी विशेषज्ञों और मीडिया की नजरें इस तारीख पर टिकी हुई हैं।

राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है मामला

यह केवल एक मानहानि का मुकदमा नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला भी है।

एक तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी हैं तो दूसरी ओर देश के गृह मंत्री अमित शाह का नाम इस विवाद से जुड़ा हुआ है। ऐसे में अदालत की हर सुनवाई राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आने वाले फैसले और टिप्पणियां भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर भी असर डाल सकती हैं।

सबको इंतजार 29 जून का

करीब सात वर्षों से चल रहे इस बहुचर्चित मुकदमे में अब 29 जून की तारीख सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सुल्तानपुर की MP-MLA कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई यह तय कर सकती है कि राहुल गांधी से जुड़े इस चर्चित मानहानि मामले की कानूनी यात्रा आगे किस दिशा में बढ़ेगी।

BUREAU : CHANDAN KUMAR

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