Khabarilaal News Desk :
नई दिल्ली। भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती देते हुए अपने बेड़े में पहला स्वदेशी एयर कुशन व्हीकल (ACV) H-561 शामिल कर लिया है। गोवा स्थित चौगुले एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के रस्साइम शिपयार्ड में आयोजित समारोह के दौरान इस अत्याधुनिक होवरक्राफ्ट को औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया गया।
यह उन छह स्वदेशी होवरक्राफ्ट की श्रृंखला का पहला प्लेटफॉर्म है, जिनका निर्माण पूरी तरह भारत में किया जा रहा है।
समुद्री सुरक्षा और निगरानी को मिलेगी नई ताकत
भारतीय तटरक्षक बल के अनुसार H-561 समुद्री सुरक्षा, तटीय निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान (Search and Rescue), कानून प्रवर्तन तथा विशेष समुद्री अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म के जरिए तटरक्षक बल समुद्र, दलदली क्षेत्रों, उथले पानी और तटीय इलाकों में तेजी से ऑपरेशन करने में सक्षम होगा।
पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित
H-561 होवरक्राफ्ट को पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। इसे देश की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता और समुद्री तकनीकी आत्मनिर्भरता का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है।
यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "आत्मनिर्भर भारत" अभियान को भी नई मजबूती देती है, जिसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता को कम करना है।
क्या होता है होवरक्राफ्ट?
होवरक्राफ्ट एक विशेष प्रकार का वाहन होता है जो हवा के कुशन (Air Cushion) पर चलता है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह:
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पानी पर चल सकता है
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दलदली क्षेत्रों में ऑपरेशन कर सकता है
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रेतीले तटीय इलाकों में भी काम कर सकता है
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उथले जल क्षेत्रों में आसानी से पहुंच सकता है
यही वजह है कि इसे तटीय सुरक्षा और बचाव अभियानों के लिए बेहद प्रभावी माना जाता है।
H-561 की प्रमुख विशेषताएं
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पहला स्वदेशी भारतीय एयर कुशन व्हीकल
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समुद्र और दलदल दोनों क्षेत्रों में संचालन सक्षम
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तटीय निगरानी और सुरक्षा मिशनों के लिए उपयोगी
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खोज एवं बचाव अभियानों में तेज प्रतिक्रिया क्षमता
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कानून प्रवर्तन और समुद्री गश्त के लिए उपयुक्त
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आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती
रक्षा निर्माण में भारत की बड़ी छलांग
अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना भारतीय उद्योग, रक्षा मंत्रालय और भारतीय तटरक्षक बल के बीच मजबूत समन्वय का परिणाम है।
इस परियोजना से:
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स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा
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जहाज निर्माण क्षेत्र में विशेषज्ञता मजबूत होगी
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रक्षा क्षेत्र में रोजगार और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा
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विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी
कोस्ट गार्ड की ताकत होगी दोगुनी
भारतीय तटरक्षक बल का मानना है कि आने वाले समय में H-561 जैसे प्लेटफॉर्म समुद्री चुनौतियों से निपटने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।
विशेष रूप से:
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तस्करी विरोधी अभियान
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अवैध घुसपैठ रोकना
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समुद्री आपदा राहत
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तटीय सुरक्षा मिशन
में इसकी भूमिका बेहद अहम होगी।
आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की ओर मजबूत कदम
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि H-561 का शामिल होना केवल एक नए प्लेटफॉर्म की एंट्री नहीं बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा तकनीकी क्षमता का प्रतीक है।
यह उपलब्धि भविष्य में स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास और भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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