Khabarilaal News Desk :

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी को लेकर नई सरकार की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। बांग्लादेश के गृह मामलों के सलाहकार सलाहुद्दीन अहमद ने कहा है कि सरकार कानूनी प्रक्रिया के तहत शेख हसीना को वापस लाना चाहती है। इसके लिए भारत को राजनयिक माध्यमों से अनुरोध भी भेजा गया है। साथ ही उन्होंने भारत के CAA और NRC पर भी प्रतिक्रिया दी है।

Sheikh Hasina की वापसी के लिए भेजा गया अनुरोध

गृह मामलों के सलाहकार सलाहुद्दीन अहमद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बांग्लादेश सरकार ने मौजूदा प्रत्यर्पण समझौते के तहत भारत से औपचारिक अनुरोध किया है, ताकि शेख हसीना बांग्लादेश में दर्ज मामलों का सामना कर सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रक्रिया को पूरी तरह कानूनी ढांचे के भीतर आगे बढ़ाना चाहती है।

अगस्त 2024 के बाद भारत में रह रही हैं Sheikh Hasina

बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन और राजनीतिक संकट के बाद हालात बिगड़ने पर शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया था। इसके बाद वह भारत पहुंचीं और तब से यहीं रह रही हैं।

राजनीतिक उथल-पुथल के बाद बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और नई व्यवस्था के तहत कई पुराने फैसलों की समीक्षा की जा रही है।

CAA और NRC पर Bangladesh सरकार की प्रतिक्रिया

भारत के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि ये भारत के आंतरिक प्रशासनिक और कानूनी विषय हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इन मामलों पर टिप्पणी करना बांग्लादेश के लिए उचित नहीं है क्योंकि ये भारतीय नागरिकों से जुड़े मुद्दे हैं।

Border Security को लेकर Bangladesh हाई अलर्ट पर

बांग्लादेश सरकार ने कहा कि अवैध घुसपैठ या सीमा पार गतिविधियों को रोकने के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सुरक्षा एजेंसियां सीमा की निगरानी बढ़ा रही हैं।

Awami League और राजनीतिक गतिविधियों पर भी सवाल

अवामी लीग के नेताओं के भाषणों और उनके प्रसारण पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा गया कि यदि किसी अदालत की ओर से रोक नहीं है तो प्रसारण संभव हो सकता है। हालांकि अदालत के आदेश होने पर उसका पालन जरूरी होगा।

Bangladesh की राजनीति में फिर बढ़ सकती है हलचल

विशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना की वापसी को लेकर शुरू हुई प्रक्रिया आने वाले समय में बांग्लादेश की राजनीति को और गर्मा सकती है। यह मामला भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी असर डाल सकता है।

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