Khabarilaal News Desk :

नई दिल्ली। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित एक मामले की सुनवाई से लगातार चार जजों द्वारा खुद को अलग किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई है। न्यायिक अधिकारी रहे अमरीश कुमार जैन की याचिका को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने न केवल हाईकोर्ट को सख्त निर्देश दिए, बल्कि कुछ वरिष्ठ वकीलों के रवैये पर भी तीखी टिप्पणी की।

न्यायिक अधिकारी की सेवा समाप्ति से जुड़ा मामला

पूर्व न्यायिक अधिकारी अमरीश कुमार जैन ने अपनी सेवा समाप्ति को चुनौती देते हुए वर्ष 2022 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि इस मामले में अब तक चार जज सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुके हैं, जिसके चलते मामला लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ है।

चार जजों के अलग होने से बढ़ी कानूनी जटिलता

इस मामले से सबसे पहले जस्टिस लिसा गिल ने खुद को अलग किया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा, लेकिन बाद में मामला दोबारा सूचीबद्ध किया गया। इसके बाद जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस दीपक सिबल ने भी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

सुप्रीम कोर्ट में केस ट्रांसफर की मांग

अमरीश कुमार जैन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अनुरोध किया कि उनके मामले को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया जाए। उनका तर्क था कि लगातार जजों के अलग होने से निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित हो रही है और संस्थागत स्तर पर सुनवाई में कठिनाई दिखाई दे रही है।

सीजेआई सूर्यकांत ने जताई कड़ी नाराजगी

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि किसी वकील या पक्षकार द्वारा जानबूझकर ऐसी स्थिति बनाई जाती है जिससे जजों को मामले से अलग होना पड़े, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि कुछ तथाकथित वरिष्ठ वकील हाईकोर्ट में अनावश्यक माहौल बना रहे हैं।

रोजाना सुनवाई करने का हाईकोर्ट को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से इस मामले के लिए विशेष डिवीजन बेंच गठित करने को कहा है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि 13 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह से मामले की दैनिक सुनवाई की जाए और फैसला सुरक्षित होने तक प्रक्रिया जारी रखी जाए।

जजों को रिक्यूजल से बचने की सलाह

सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट कहा कि गठित की जाने वाली बेंच किसी भी परिस्थिति में मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग न करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी अनुपालन रिपोर्ट

मामले में अंतिम आदेश पारित करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को फिलहाल लंबित रखा है। साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया है कि जैसे ही डिवीजन बेंच फैसला सुरक्षित रखे, उसकी अनुपालन रिपोर्ट सर्वोच्च अदालत में प्रस्तुत की जाए।

BUREAU : CHANDAN KUMAR

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