KhabariLaal News Desk :
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती समुद्री गतिविधियों के बीच भारत ने अपनी पनडुब्बी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत अब प्रोजेक्ट 75(I) के तहत प्रस्तावित 6 पनडुब्बियों के अलावा 3 अतिरिक्त डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां भी खरीदने की तैयारी कर रहा है।
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान को चीन से आधुनिक पनडुब्बियां मिलनी शुरू हो गई हैं और हाल ही में उसकी एक पनडुब्बी श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह के पास भी देखी गई।
6 नहीं, अब 9 पनडुब्बियों की तैयारी
रक्षा सूत्रों के अनुसार भारत ने अपनी अंडरवॉटर कॉम्बैट क्षमता बढ़ाने के लिए पहले चरण में कुल 9 पारंपरिक पनडुब्बियों की योजना बनाई है।
प्रोजेक्ट 75(I) के तहत एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस 6 अत्याधुनिक पनडुब्बियां बनाई जाएंगी। इसके बाद अतिरिक्त 3 पनडुब्बियों के निर्माण पर भी विचार किया जा रहा है।
भारतीय नौसेना का मानना है कि आने वाले वर्षों में उसकी कई पुरानी पनडुब्बियां सेवा से बाहर हो जाएंगी, इसलिए समय रहते बेड़े का विस्तार जरूरी है।
चीन की बढ़ती ताकत बनी चिंता
अनुमानों के अनुसार चीन के पास इस समय लगभग 65 पनडुब्बियां हैं, जो संख्या के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी पनडुब्बी ताकतों में शामिल है।
इसके मुकाबले भारतीय नौसेना के पास करीब 19 पनडुब्बियां हैं, जिनमें से कई अगले दशक में रिटायर होने वाली हैं। ऐसे में हिंद महासागर में सामरिक संतुलन बनाए रखना भारत के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
जर्मनी के साथ मिलकर बनेगी नई ताकत
प्रोजेक्ट 75(I) के तहत सरकारी कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders Limited और जर्मनी की ThyssenKrupp Marine Systems मिलकर नई पीढ़ी की पनडुब्बियां तैयार कर सकती हैं।
इन पनडुब्बियों में अत्याधुनिक AIP तकनीक होगी, जिससे वे लंबे समय तक समुद्र के भीतर रहकर मिशन पूरा कर सकेंगी।
स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का विकल्प भी खुला
भारतीय नौसेना पहले अतिरिक्त तीन Scorpene-class submarine पनडुब्बियों के प्रस्ताव पर भी विचार कर चुकी है।
हालांकि कीमत और अन्य तकनीकी मुद्दों के कारण यह योजना फिलहाल धीमी पड़ गई है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस विकल्प को फिर सक्रिय किया जा सकता है।
पाकिस्तान को चीन से मिल रही हैं आधुनिक पनडुब्बियां
दूसरी ओर पाकिस्तान अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ाने के लिए चीन के साथ बड़े रक्षा सहयोग पर काम कर रहा है।
हाल ही में पाकिस्तान ने अपनी पहली PNS Hangor पनडुब्बी को नौसेना में शामिल किया है। यह पनडुब्बी चीन में निर्मित है और पाकिस्तान को कुल 8 ऐसी पनडुब्बियां मिलने वाली हैं।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन पनडुब्बियों का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में पाकिस्तान की रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाना और भारत पर दबाव बनाना है।
हिंद महासागर में बढ़ेगी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में हिंद महासागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्रों में से एक बनने जा रहा है। चीन, पाकिस्तान और भारत तीनों अपनी समुद्री क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
भारत का 9 नई पनडुब्बियों की दिशा में बढ़ता कदम इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली हिंद महासागर में किसी भी रणनीतिक चुनौती का मुकाबला करने के लिए अपनी समुद्री शक्ति को और मजबूत करना चाहती है।
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