Khabarilaal News Desk :
नई दिल्ली। जीवन बीमा क्लेम से जुड़े एक अहम मामले में उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि बिना ठोस सबूत के बीमा क्लेम खारिज करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। मामले में एक महिला की बीमा पॉलिसी लेने के केवल पांच दिन बाद मौत हो गई थी, जिसके बाद बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया था।
बीमा लेने के 5 दिन बाद हो गई मौत
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम निवासी सवारा भास्कर की पत्नी सवारा राधा ने मार्च 2025 में 50 लाख रुपये की जीवन बीमा पॉलिसी खरीदी थी। इसके लिए उन्होंने 50 हजार रुपये का वार्षिक प्रीमियम जमा किया था।
पॉलिसी शुरू होने के महज पांच दिन बाद उन्हें हार्ट अटैक आया और उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद पति ने नामांकित व्यक्ति (Nominee) के तौर पर बीमा क्लेम दाखिल किया।
कंपनी ने क्लेम देने से किया इनकार
बीमा कंपनी ने जांच का हवाला देते हुए दावा किया कि पॉलिसी लेते समय महिला ने स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई थी। इसी आधार पर कंपनी ने पॉलिसी रद्द करने और डेथ क्लेम अस्वीकार करने का फैसला लिया।
कंपनी का कहना था कि पॉलिसी फ्री-लुक अवधि में रद्द कर दी गई थी, इसलिए क्लेम देय नहीं है।
उपभोक्ता आयोग पहुंचा मामला
पत्नी को खोने के बाद परेशान पति ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने बीमा कंपनी से सबूत मांगे, लेकिन कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि गलत जानकारी जानबूझकर छिपाई गई थी।
आयोग ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर किसी बीमा क्लेम को खारिज नहीं किया जा सकता।
आयोग ने सुनाया बड़ा फैसला
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि बीमा कंपनी ने प्रीमियम लेने और प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद पॉलिसी जारी की थी। ऐसे में बाद में तकनीकी आधारों पर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता।
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि—
- मृतक महिला के पति को 50 लाख रुपये बीमा राशि दी जाए।
- इसके साथ निर्धारित ब्याज भी अदा किया जाए।
- 25 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए।
- 5 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी चुकाया जाए।
बीमा ग्राहकों के लिए बड़ा संदेश
आयोग के इस फैसले को बीमा उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले में स्पष्ट किया गया कि बीमा कंपनियां बिना पर्याप्त साक्ष्य के क्लेम खारिज नहीं कर सकतीं।
विशेषज्ञों के अनुसार बीमा लेते समय सभी जानकारी सही भरना, मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और क्लेम विवाद की स्थिति में उपभोक्ता आयोग का सहारा लेना बेहद जरूरी है।
क्या सीख मिलती है?
- बीमा फॉर्म भरते समय सभी जानकारियां सही दें।
- स्वास्थ्य संबंधी तथ्यों को कभी न छिपाएं।
- पॉलिसी दस्तावेज ध्यान से पढ़ें।
- क्लेम खारिज होने पर कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करें।
- उपभोक्ता आयोग बीमा विवादों में प्रभावी राहत दे सकता है।
यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए कानून पूरी तरह सक्रिय है और मनमाने ढंग से क्लेम खारिज करने वाली कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
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