Khabarilaal News Desk :

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले गौमाता का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। खास बात यह है कि इस बार गौरक्षा और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग विपक्षी नेताओं और कुछ मुस्लिम संगठनों की ओर से उठाई गई, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी मुद्दे को विपक्ष पर हमला बोलने का नया हथियार बना लिया है।

हाल के दिनों में गाय की सुरक्षा, गौरक्षा और गौहत्या को लेकर उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। बकरीद से पहले शुरू हुई बहस अब चुनावी विमर्श का हिस्सा बनती दिखाई दे रही है।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की उठी मांग

अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी मोहम्मद इकबाल अंसारी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि भारतीय मुसलमानों को भी गाय का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गाय की कुर्बानी नहीं होनी चाहिए और सरकार को इसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर विचार करना चाहिए।

इसी तरह जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का समर्थन करते हुए कहा कि इससे गाय के नाम पर होने वाली हिंसा और सामाजिक तनाव को रोका जा सकता है।

पश्चिम बंगाल से शुरू हुआ विवाद

बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल में पशु वध को लेकर जारी सरकारी निर्देशों के बाद विवाद बढ़ा। इस दौरान कुछ नेताओं ने गाय की कुर्बानी को लेकर बयान दिए, जिसके बाद गौरक्षा और धार्मिक भावनाओं को लेकर बहस तेज हो गई।

राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया, जहां गाय और गौरक्षा को लेकर बयानबाजी ने नया मोड़ ले लिया।

योगी आदित्यनाथ का तीखा जवाब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में आयोजित एक कार्यक्रम में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गाय हिंदू समाज के लिए केवल पशु नहीं बल्कि माता है।

उन्होंने कहा कि गाय का सम्मान किसी सरकारी घोषणा का मोहताज नहीं है। योगी ने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग एक तरफ गौरक्षा की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर गोहत्या में शामिल लोगों को संरक्षण देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय को 'पशु' बताना सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति की भावना के विपरीत है।

संत समाज भी हुआ सक्रिय

इस बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी प्रदेश में गायों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में गायों की हालत चिंताजनक है और गौरक्षा को चुनावी मुद्दा बनाया जाना चाहिए।

अयोध्या के कई संतों और धर्माचार्यों ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि भारतीय संस्कृति में उन्हें पहले से ही माता का दर्जा प्राप्त है।

विपक्ष ने उठाए दूसरे सवाल

समाजवादी पार्टी की ओर से इस बहस के बीच मांस निर्यात और पशु संरक्षण की नीतियों पर सवाल उठाए गए। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार धार्मिक मुद्दों को उछालकर बेरोजगारी, महंगाई और किसानों से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

हालांकि भाजपा का दावा है कि प्रदेश में हजारों गौशालाओं के माध्यम से लाखों गायों को संरक्षण दिया जा रहा है और गौरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

चुनावी मुद्दा बनने के संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गौरक्षा और गौमाता का मुद्दा आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विपक्ष जहां इस विषय के जरिए सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं भाजपा इसे सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था से जोड़कर अपने पक्ष में माहौल बनाने की तैयारी कर रही है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले महीनों में गौमाता और गौरक्षा का मुद्दा उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति के सबसे चर्चित विषयों में शामिल हो सकता है।

DESK REPORTER – CHANDAN KUMAR

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