Khabarilaal News Desk :
Varanasi जिले के पिंडरा विकासखंड अंतर्गत अहरक ग्राम सभा में सरकारी खड़ंजे को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव के एक युवक द्वारा सरकारी खड़ंजे पर लगातार मिट्टी डाली जा रही है, जिससे रास्ते का स्वरूप प्रभावित हो रहा है और आम लोगों के आवागमन में परेशानी बढ़ रही है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत भवन के बगल स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के सामने वर्षों पहले सरकारी खड़ंजे का निर्माण कराया गया था। यह मार्ग गांव के लोगों के लिए मुख्य रास्तों में से एक माना जाता है और लंबे समय से सार्वजनिक उपयोग में रहा है।
युवक पर सरकारी रास्ता पाटने का आरोप
ग्रामवासियों का आरोप है कि राजभर बस्ती निवासी सुभाष राजभर कथित रूप से इस खड़ंजे को निजी रास्ता साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। आरोप है कि पिछले कुछ समय से रास्ते पर लगातार मिट्टी डाली जा रही है, जिससे उसका मूल स्वरूप प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब तीन महीने पहले भी रास्ते पर अवरोध खड़ा कर आवागमन बाधित किया गया था। उस समय ग्रामीणों के विरोध के बाद रास्ता दोबारा खोल दिया गया था, लेकिन अब फिर से खड़ंजे को पाटने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों में बढ़ी नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो सरकारी रास्ते का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो सकता है। उनका आरोप है कि मिट्टी डालने के कारण रास्ता संकरा होता जा रहा है, जिससे लोगों को आने-जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
गांव के लोगों ने आशंका जताई है कि यदि स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।
प्रशासन से जांच की मांग
ग्रामीणों ने राजस्व और पंचायत विभाग के अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी अभिलेखों के आधार पर खड़ंजे और भूमि की पैमाइश कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि रास्ता सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है तो उस पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवरोध तत्काल हटाया जाना चाहिए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- सरकारी खड़ंजे और भूमि की पैमाइश कराई जाए।
- खड़ंजे पर डाली गई मिट्टी हटाकर मूल स्वरूप बहाल किया जाए।
- सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन नियमित निगरानी करे।
सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा मामला
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक रास्ते का विवाद नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति और गांव के लोगों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। अब गांव के लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है और वे जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
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