Khabarilaal News Desk :
दुनिया अभी कई स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ ही रही थी कि अब इबोला वायरस के एक नए और दुर्लभ स्ट्रेन ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में फैल रहे बुंडिबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है।
906 संदिग्ध मामले, 223 मौतों की जांच
WHO के ताजा आंकड़ों के मुताबिक DRC में अब तक 906 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जबकि 223 संदिग्ध मौतों की जांच की जा रही है। इसके अलावा DRC और युगांडा में मिलाकर 134 पुष्ट मामले और 18 पुष्ट मौतें दर्ज की गई हैं। संक्रमण मुख्य रूप से इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों में फैला हुआ है।
30 से 50 प्रतिशत तक मौत का खतरा
WHO की हाई थ्रेट पैथोजन्स टीम की विशेषज्ञ एनाइस लेगैंड के अनुसार इस स्ट्रेन में संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 30 से 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यानी हर 10 संक्रमितों में से 3 से 5 लोगों की जान जाने का खतरा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती पहचान और समय पर इलाज मिलने से मृत्यु दर को कम किया जा सकता है।
क्यों खतरनाक है बुंडिबुग्यो स्ट्रेन?
इबोला के इस बुंडिबुग्यो स्ट्रेन को लेकर विशेषज्ञ इसलिए ज्यादा चिंतित हैं क्योंकि:
- इसका कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
- कोई विशेष एंटीवायरल इलाज स्वीकृत नहीं है।
- यह लंबे समय तक बिना पहचान के फैलता रहा।
- प्रभावित क्षेत्र घनी आबादी और सीमा पार आवाजाही वाला इलाका है।
- संपर्क ट्रेसिंग और निगरानी में दिक्कतें आ रही हैं।
WHO ने घोषित की अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातस्थिति
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए WHO ने 16 मई को इस प्रकोप को "Public Health Emergency of International Concern (PHEIC)" घोषित कर दिया था। संगठन का कहना है कि संक्रमण तेजी से फैल रहा है और प्रतिक्रिया प्रयासों से आगे निकलता दिखाई दे रहा है।
युगांडा तक पहुंचा संक्रमण
कांगो के अलावा पड़ोसी देश युगांडा में भी संक्रमण के मामले सामने आए हैं। WHO के अनुसार वहां कई पुष्ट मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें कुछ मामले DRC से आयातित पाए गए हैं। फिलहाल सामुदायिक स्तर पर बड़े पैमाने पर संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।
WHO प्रमुख खुद पहुंचे प्रभावित क्षेत्र
WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस हाल ही में कांगो के बुनीय क्षेत्र पहुंचे, जहां यह प्रकोप सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है। उन्होंने स्थानीय लोगों से सुरक्षित अंतिम संस्कार प्रक्रियाओं का पालन करने और लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज लेने की अपील की है।
जांच और निगरानी बढ़ाने पर जोर
WHO और स्थानीय स्वास्थ्य एजेंसियां टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने, संपर्कों की पहचान करने और संक्रमित मरीजों को अलग रखने पर जोर दे रही हैं। संगठन का कहना है कि आने वाले दिनों में संदिग्ध मामलों की संख्या और बढ़ सकती है, लेकिन यह बेहतर निगरानी व्यवस्था का भी संकेत हो सकता है।
क्या है इबोला वायरस?
इबोला एक गंभीर और अक्सर जानलेवा वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के रक्त, शरीर के तरल पदार्थ या संक्रमित सतहों के संपर्क से फैलती है। इसके प्रमुख लक्षणों में:
- तेज बुखार
- उल्टी
- दस्त
- कमजोरी
- आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव
शामिल हो सकते हैं। WHO के अनुसार शुरुआती इलाज और सहायक चिकित्सा से मरीजों के बचने की संभावना बढ़ जाती है।
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