Khabrilaal News Desk :
नई दिल्ली – भारत का फुटवियर उद्योग अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। टेक्निकल टेक्सटाइल के इस्तेमाल से जूतों का डिजाइन, मजबूती और आराम पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हो रहा है। इससे न सिर्फ घरेलू बाजार मजबूत हो रहा है, बल्कि भारत को ग्लोबल फुटवियर एक्सपोर्ट में भी बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है।
फुटवियर इंडस्ट्री में भारत की मजबूत स्थिति
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फुटवियर उत्पादक देश है। हर साल करीब 2.9 अरब जोड़ी जूते बनाए जाते हैं, लेकिन वैश्विक निर्यात में हिस्सेदारी अभी भी लगभग 2% ही है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेक्निकल टेक्सटाइल इस गैप को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
क्या है टेक्निकल टेक्सटाइल का रोल
टेक्निकल टेक्सटाइल ऐसे उन्नत कपड़े होते हैं जो जूतों को हल्का, टिकाऊ, हवादार और ज्यादा आरामदायक बनाते हैं। आगरा, कानपुर और चेन्नई जैसे शहरों में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे प्रोडक्ट की क्वालिटी में सुधार हो रहा है।
बदलती उपभोक्ता पसंद
आज के उपभोक्ता हल्के, कुशनिंग वाले और स्टाइलिश जूते पसंद कर रहे हैं। अब जूते सिर्फ फैशन नहीं बल्कि परफॉर्मेंस और आराम का कॉम्बिनेशन बन चुके हैं।
टेक्नोलॉजी से मिल रही नई ताकत
AI, डिजिटल डिजाइन और 3D मैन्युफैक्चरिंग जैसी तकनीकों के जरिए अब जूतों को कस्टमाइज करना आसान हो गया है। इससे उत्पादन तेज और बेहतर हो रहा है।
पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद
रीसाइकल प्लास्टिक और बायोडिग्रेडेबल फाइबर जैसे मटेरियल के इस्तेमाल से फुटवियर इंडस्ट्री अब पर्यावरण के प्रति भी जिम्मेदार बन रही है।
रोजगार और विकास का बड़ा जरिया
भारत में इस सेक्टर से 20 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है, जिनमें करीब 50% महिलाएं शामिल हैं। इससे यह उद्योग समावेशी विकास का बड़ा उदाहरण बन रहा है।
आगे का रास्ता
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर भारत टेक्निकल टेक्सटाइल को संगठित तरीके से अपनाता है, तो वह ग्लोबल फुटवियर मार्केट में अपनी हिस्सेदारी कई गुना बढ़ा सकता है।
फुटवियर और टेक्निकल टेक्सटाइल का यह संगम भारत को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। आने वाले समय में ‘Made in India’ जूते दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
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