Khabrilaal News Desk :
भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने सूरीनाम की राजधानी Paramaribo में वैश्विक राजनीति, वैक्सीन डिप्लोमेसी और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए इशारों में अमेरिका समेत विकसित देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि कोविड महामारी के दौरान एक देश ने अपनी आबादी से आठ गुना ज्यादा वैक्सीन जमा कर ली थी, जबकि कई गरीब और विकासशील देश वैक्सीन के लिए संघर्ष कर रहे थे।
दुनिया में संसाधनों का हो रहा ‘हथियारीकरण’
सूरीनाम में भारतीय समुदाय और समाज के विभिन्न वर्गों को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और कई देश वित्त, संसाधन, तकनीक, कनेक्टिविटी और यहां तक कि भूगोल का भी रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि अब वैश्विक शक्ति केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि आर्थिक और तकनीकी प्रभाव भी देशों के लिए बड़ा हथियार बन चुका है।
कोविड और यूक्रेन युद्ध का किया जिक्र
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया अभी कोविड-19 महामारी से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू हो गया, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर रूप से प्रभावित किया।उन्होंने कहा कि जिस युद्ध को कुछ लोग कुछ हफ्तों का मान रहे थे, वह अब वर्षों तक खिंच चुका है और उसका असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है।
भारत की ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल की सराहना
जयशंकर ने भारत की ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन समय में भारत ने जिम्मेदारी निभाई और बड़ी संख्या में देशों को कोविड वैक्सीन उपलब्ध कराई।उन्होंने कहा कि जब कई विकसित देश वैक्सीन जमा करने में लगे थे, तब भारत जरूरतमंद देशों तक दवाएं और वैक्सीन पहुंचाने का काम कर रहा था।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका
विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार इस वर्ष वैश्विक आर्थिक विकास में भारत का योगदान लगभग 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी आर्थिक और तकनीकी क्षमता बढ़ाकर दुनिया के लिए नए विकल्प तैयार कर रहा है।जयशंकर ने कहा कि भारत वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने और दुनिया की अर्थव्यवस्था को “रिस्क-फ्री” बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सूरीनाम में भारतीय समुदाय से जुड़ा ऐतिहासिक रिश्ता
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में सूरीनाम और भारत के ऐतिहासिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आजादी से पहले बड़ी संख्या में भारतीयों को गिरमिटिया मजदूर के रूप में सूरीनाम ले जाया गया था, जो आज वहां एक प्रभावशाली समुदाय के रूप में स्थापित हैं।
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