Khabrilaal News Desk :

तमिलनाडु – दक्षिण भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अभिनेता से नेता बने Thalapathy Vijay ने अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। 234 सीटों वाली विधानसभा में 108 सीटें जीतकर उनकी पार्टी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है और अब उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।

राजनीति में नई ताकत के रूप में उभरे विजय

विजय की इस जीत को सिर्फ चुनावी सफलता नहीं बल्कि दक्षिण भारत की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। फिल्मी दुनिया में अपार लोकप्रियता के बाद अब उन्होंने राजनीति में भी अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी है। उनकी पार्टी ने कम समय में जिस तरह जनसमर्थन हासिल किया, उसने पारंपरिक राजनीतिक दलों को चौंका दिया है।

श्रीलंका में भी गूंज रही जीत की चर्चा

विजय की इस जीत का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी देश Sri Lanka में भी इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहां के तमिल मीडिया ने इसे “सुनामी जैसी जीत” करार दिया है। कई श्रीलंकाई तमिल नेताओं ने विजय को बधाई देते हुए उनके साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई है।हालांकि, इस जीत के साथ ही कच्चातिवु द्वीप का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

कच्चातिवु द्वीप बना विवाद का केंद्र

कच्चातिवु द्वीप भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। 1974 के समझौते के तहत यह द्वीप श्रीलंका को सौंपा गया था, लेकिन तमिलनाडु में इसे लेकर लगातार विरोध होता रहा है। विजय पहले भी इस मुद्दे पर खुलकर बोल चुके हैं और तमिल मछुआरों की सुरक्षा को लेकर उन्होंने इस द्वीप को वापस लेने की मांग की थी।उनके इस रुख को देखते हुए अब यह आशंका जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ सकता है।

मछुआरों की सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा

तमिलनाडु के मछुआरे लंबे समय से श्रीलंकाई नौसेना के साथ टकराव का सामना करते रहे हैं। विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था और कहा था कि मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता होगी।यही कारण है कि उनकी जीत के बाद श्रीलंका में भी इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि भविष्य में दोनों देशों के बीच समुद्री सीमाओं को लेकर विवाद बढ़ सकता है।

आगे क्या?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय का सत्ता में आना भारत-श्रीलंका संबंधों के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है। जहां एक ओर यह तमिलनाडु की राजनीति को नई दिशा देगा, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक स्तर पर भी कई चुनौतियां सामने आ सकती हैं।फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सत्ता संभालने के बाद विजय अपने वादों और बयानों को किस तरह अमल में लाते हैं और कच्चातिवु जैसे संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

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