Khabarilaal News Desk :
रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच एक बार फिर रूसी MiG-31 लड़ाकू विमान चर्चा में है। यूक्रेन में अपनी लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता और हाइपरसोनिक Kinzhal मिसाइल लॉन्च करने की ताकत के कारण इसे बेहद खतरनाक माना जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रूस ने कभी यही विमान भारत को भी ऑफर किया था, जिसे भारतीय वायुसेना ने ठुकरा दिया था।
यूक्रेन में MiG-31 का दिखा दम
यूक्रेनी एयरफोर्स के मुताबिक, रूस ने 26 जनवरी को 55 मिसाइलें, 24 शाहेद ड्रोन और एक Kh-47 Kinzhal हाइपरसोनिक मिसाइल दागी थी। बताया गया कि Kinzhal मिसाइल MiG-31 से लॉन्च की गई थी।
MiG-31 की लंबी दूरी की R-37M मिसाइलें यूक्रेन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, जिनकी वजह से यूक्रेनी और नाटो विमानों को दूरी बनाकर रखनी पड़ रही है।
क्या है MiG-31 की सबसे बड़ी ताकत?
MiG-31 को दुनिया के सबसे तेज लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। इसे सोवियत संघ ने MiG-25 की जगह लेने के लिए विकसित किया था।
इसकी खासियतें:
- अधिकतम गति Mach 2.8 के करीब
- 400 किमी तक टारगेट पहचानने वाला Zaslon-M रडार
- एक साथ 24 लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता
- एक साथ 8 लक्ष्यों पर हमला
- Mach 6 की R-37 मिसाइल, जिसकी रेंज 400 किमी तक
- एंटी-सैटेलाइट मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता
एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने उड़ाया था MiG-31
भारत के पूर्व एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने यूरेशियन टाइम्स में लिखा कि उन्होंने 1999 में रूस के सोकोल एयरक्राफ्ट प्लांट में MiG-31 उड़ाया था।
उन्होंने बताया कि विमान ने बेहद तेजी से गति पकड़ी और 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर Mach 2.7 तक पहुंच गया। उनके मुताबिक, सुपरसोनिक उड़ान का अनुभव बेहद सहज था।
भारत ने क्यों ठुकराया MiG-31?
रूस ने भारत को MiG-31 खरीदने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन भारतीय वायुसेना ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।
इसके पीछे कई वजहें थीं:
1. पुराना प्लेटफॉर्म
अपग्रेड के बावजूद MiG-31 एक पुराना इंटरसेप्टर प्लेटफॉर्म था, जिसे खास तौर पर हाई-स्पीड इंटरसेप्शन के लिए डिजाइन किया गया था।
2. मल्टी-रोल क्षमता की कमी
IAF को ऐसे विमान की जरूरत थी जो कई भूमिकाएं निभा सके। MiG-31 इस मामले में Su-30MKI और Mirage-2000 जितना प्रभावी नहीं था।
3. लॉजिस्टिक्स और रखरखाव महंगा
MiG-25 के अनुभव से भारतीय वायुसेना पहले ही ऐसे विमानों के रखरखाव की कठिनाइयों को समझ चुकी थी।
4. Su-30MKI पर पहले ही फैसला
भारत पहले ही रूसी Su-30MKI को अपने मुख्य लड़ाकू विमान के रूप में चुन चुका था और उसी पर निवेश कर रहा था।
5. ASAT क्षमता की जरूरत नहीं
MiG-31 की एंटी-सैटेलाइट क्षमता भारत के लिए आकर्षण नहीं थी, क्योंकि भारत अपनी खुद की जमीन आधारित ASAT तकनीक विकसित कर चुका था।
इसलिए भारत ने कहा ‘ना’
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना सीमित बजट में ज्यादा प्लेटफॉर्म जोड़कर लॉजिस्टिक्स नहीं बढ़ाना चाहती थी। यही वजह रही कि MiG-31 जैसा ताकतवर विमान भी भारत की जरूरतों में फिट नहीं बैठा।
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