Khabarilaal News Desk :

भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से अटका तीस्ता जल विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इस बार बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर के बयान ने नई हलचल पैदा कर दी है।

ढाका में विदेश मंत्रालय में बोलते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब तीस्ता जल बंटवारा समझौते को आगे बढ़ाने में नई उम्मीद जगी है।

ममता के जाने के बाद बदली उम्मीद

कबीर ने कहा कि अब पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी भाजपा सत्ता में है। ऐसे में भारत लंबे समय से जिस राजनीतिक बाधा की बात करता था, वह अब खत्म हो गई है।

उनका इशारा साफ तौर पर ममता बनर्जी की सरकार के हटने की ओर था।

तीस्ता पर चीन का भी जिक्र

हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि तीस्ता परियोजना को लेकर चीन के साथ सकारात्मक बातचीत हुई है।

उन्होंने बताया कि चीन का एक्सिम बैंक इस परियोजना को फंड करने के लिए तैयार है और फिलहाल सर्वे रिपोर्ट की समीक्षा चल रही है।

यानी साफ है कि अगर भारत के साथ बातचीत आगे नहीं बढ़ती, तो बांग्लादेश के पास चीन का विकल्प खुला है।

क्या है तीस्ता विवाद?

तीस्ता नदी सिक्किम से निकलकर पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है।

इस नदी का पानी दोनों देशों के लाखों किसानों के लिए जीवनरेखा है, लेकिन जल बंटवारे पर वर्षों से सहमति नहीं बन पाई है।

बांग्लादेश लंबे समय से चाहता है कि उसे सूखे मौसम में ज्यादा पानी मिले, जबकि भारत में पश्चिम बंगाल इस पर आपत्ति जताता रहा है।

भारत की चिंता क्यों बढ़ी?

तीस्ता प्रोजेक्ट का इलाका भारत के बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ के करीब है।

अगर चीन इस प्रोजेक्ट में गहराई से शामिल होता है, तो भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं क्योंकि यह इलाका पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।

अब नजर भारत के फैसले पर

बांग्लादेश ने संकेत दे दिया है कि वह तीस्ता मुद्दे को जल्द हल करना चाहता है। अब सबकी नजर भारत पर है कि नई राजनीतिक परिस्थितियों में क्या यह पुराना विवाद आखिरकार खत्म होगा या फिर चीन की एंट्री इसे और जटिल बना देगी।

 
 
 
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