Khabarilaal News Desk :

भारत समेत पूरी दुनिया के लिए 2026-27 का मौसम बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। National Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) के नए पूर्वानुमान ने ‘सुपर अलनीनो’ का खतरा बढ़ा दिया है, जिससे भीषण गर्मी, कमजोर मानसून, सूखा और बाढ़ जैसी स्थितियां बन सकती हैं।

क्या है सुपर अलनीनो?

अलनीनो El Niño–Southern Oscillation (ENSO) का गर्म चरण है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से काफी बढ़ जाता है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पैटर्न पर पड़ता है। अगर यह ‘सुपर अलनीनो’ में बदलता है, तो यह अब तक के सबसे शक्तिशाली अलनीनो में शामिल हो सकता है।

NOAA ने जताई 65% संभावना

NOAA के मुताबिक अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच सुपर अलनीनो बनने की 65% संभावना है। वहीं मई से जुलाई 2026 के बीच इसके शुरू होने की संभावना 82% तक बताई गई है।

IMD को मानसून की चिंता

India Meteorological Department (IMD) ने पहले ही आशंका जताई है कि अलनीनो के कारण भारत में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। अप्रैल 2026 के अनुमान के अनुसार, इस साल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का करीब 92% रह सकती है, जो सामान्य से कम मानी जाती है।

किसानों और फसलों पर बड़ा असर

कम बारिश का सबसे ज्यादा असर वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों पर पड़ेगा। इससे खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है और कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।

2027 बन सकता है सबसे गर्म साल

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सुपर अलनीनो आता है, तो 2027 धरती के इतिहास का सबसे गर्म साल बन सकता है। 2023-24 का अलनीनो पहले ही 2024 को रिकॉर्ड गर्म वर्ष बना चुका है।

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