Khabarilaal News Desk :

China की रेयर अर्थ मिनरल्स पर वैश्विक पकड़ को चुनौती देने की दिशा में Australia ने बड़ा कदम उठाया है। ऑस्ट्रेलिया ने चीन से जुड़े निवेशकों को Northern Minerals में अपनी हिस्सेदारी बेचने का आदेश दिया है। इस फैसले को चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

ऑस्ट्रेलियाई ट्रेजरी के मुताबिक चीनी निवेशकों ने Northern Minerals पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की थी। यह कंपनी पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में Brown Range Project विकसित कर रही है, जहां डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे दुर्लभ खनिजों का बड़ा भंडार मौजूद है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये मिनरल्स?

डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे रेयर अर्थ मिनरल्स का इस्तेमाल हाई-परफॉर्मेंस मैग्नेट बनाने में होता है, जो इलेक्ट्रिक वाहन, पवन टर्बाइन, स्मार्टफोन, और रक्षा उपकरणों में जरूरी हैं। इन खनिजों पर चीन का लगभग एकाधिकार माना जाता है।

दुनिया के रेयर अर्थ बाजार पर चीन की बादशाहत

China दुनिया के करीब 60% रेयर अर्थ कच्चे माल का उत्पादन करता है और 95% से अधिक प्रोसेसिंग नियंत्रित करता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश अब चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत के लिए क्यों बड़ा मौका?

India और ऑस्ट्रेलिया पहले से रणनीतिक साझेदार हैं। Australia-India Economic Cooperation and Trade Agreement (ECTA) के तहत दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों के व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिल रहा है।

ऑस्ट्रेलिया में भारत ने 21 महत्वपूर्ण खनिज भंडार पहचाने

भारत ने ऑस्ट्रेलिया में 49 महत्वपूर्ण खनिजों में से 21 के बड़े भंडार चिह्नित किए हैं। इनमें लिथियम, कोबाल्ट, जिरकॉन, और रेयर अर्थ तत्व शामिल हैं, जो भारत की सप्लाई चेन मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

हिंद-प्रशांत में मजबूत हो रही साझेदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी चीन के प्रभाव को संतुलित करने में अहम भूमिका निभा सकती है। इससे भारत को स्वच्छ ऊर्जा और हाई-टेक निर्माण क्षेत्र में बड़ा लाभ मिल सकता है।

 
 
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