Khabarilaal News Desk :

Pakistan की राजनीति में ‘साइफर विवाद’ ने एक बार फिर भूचाल ला दिया है। अमेरिकी खोजी मीडिया प्लेटफॉर्म Drop Site News द्वारा कथित मूल दस्तावेज प्रकाशित किए जाने के बाद पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति Arif Alvi ने बड़ा दावा किया है।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट के मुताबिक, लीक दस्तावेज में पाकिस्तान के तत्कालीन वाशिंगटन स्थित राजदूत और अमेरिकी अधिकारी Donald Lu के बीच हुई बातचीत का विवरण है। दावा है कि यह बातचीत अप्रैल 2022 में Imran Khan की सरकार गिरने से ठीक पहले हुई थी।

आरिफ अल्वी का बड़ा आरोप

आरिफ अल्वी ने कहा कि पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान ने चार साल तक इस मामले को दबाए रखा और लगातार यह दावा किया कि ऐसा कोई दस्तावेज मौजूद ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Asim Munir ने इस पूरे घटनाक्रम में भूमिका निभाई।

'यह कूटनीति नहीं, धमकी थी'

अल्वी ने दावा किया कि डोनाल्ड लू ने पाकिस्तान के राजदूत से कहा था कि अगर इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है तो वॉशिंगटन में "सब कुछ माफ" कर दिया जाएगा, अन्यथा पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया जाएगा।

न्यायपालिका पर भी उठाए सवाल

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने मई 2022 में तत्कालीन चीफ जस्टिस Umar Ata Bandial को न्यायिक आयोग बनाने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

'इमरान खान को झूठे मामलों में जेल भेजा गया'

आरिफ अल्वी ने आरोप लगाया कि इमरान खान को झूठे मामलों में जेल भेजा गया और पाकिस्तान के लोकतंत्र को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया गया।

'लंदन फाइल्स' का फिर जिक्र

अल्वी के बयान के बाद इमरान खान के पुराने ‘लंदन फाइल्स’ दावे की भी चर्चा तेज हो गई है, जिसमें उन्होंने अपनी सरकार गिराने के पीछे घरेलू और विदेशी साजिश का आरोप लगाया था।

 
 
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