वाराणसी।पिंडरा बाजार स्थित‘श्री राधे कुंज’ में चल रहे श्रीमद भागवत कथा का छठा दिन भक्ति और आध्यात्मिकता के रंग में सराबोर रहा। इस अवसर पर रुक्मिणी-कृष्ण विवाह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहरे आध्यात्मिक भाव में डुबो दिया।
रुक्मणी जी का हरण कर श्री कृष्ण ने किया था विधिवत विवाह
कथा वाचक आचार्य परमानंद पाठक महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में बताया कि रुक्मिणी जी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानते हुए उन्हें पत्र लिखकर अपने हरण का आग्रह किया। जब उनके परिवार द्वारा विवाह अन्यत्र निश्चित किया गया, तब उन्होंने अपनी अटूट श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान को पुकारा। उनके निष्कलंक प्रेम और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं आए और रुक्मिणी जी का हरण कर विधिवत उनसे विवाह किया।
भागवत कथा सच्चे प्रेम अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण का अनुपम उदाहरण
आचार्य जी ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि यह कथा केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जब भक्त सच्चे हृदय से भगवान को स्मरण करता है, तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते हैं और उसके जीवन को सुख, शांति एवं आनंद से भर देते हैं।
भजन कीर्तन शंखनाद और जय श्री कृष्ण के जयकारे से भक्ति में हुआ वातावरण
कथा के दौरान भजन-कीर्तन, शंखनाद और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का रसास्वादन करते रहे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।आयोजन के संयोजन में सरोज वर्मा , राहुल ,पवन वर्मा , कृष्णकांत व दीक्षा सहित अन्य भक्तों का सराहनीय सहयोग रहा ।
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