वाराणसी।आज के दौर में जहाँ रोज़गार के लिए लोग बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, वहीं वाराणसी के दासेपुर (हरहुआ) में एक ऐसी पहल शुरू हुई है जो न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत कर रही है, बल्कि हमारी 'मातृशक्ति' को आत्मनिर्भर भी बना रही है।
महिलाओं ने मजबूरी को बना रही अपनी मज़बूती
'दास मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेडर्स' (DAAS Manufacturing & Traders) आज उन महिलाओं और लड़कियों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है, जिन्हें काम की तलाश में दर-दर भटकना पड़ता था। यहाँ गाँव की बेटियों और बहुओं को सिलाई, लोअर मैन्युफैक्चरिंग और कपड़ों से जुड़े विभिन्न कार्यों में प्रशिक्षित कर उन्हें सम्मानजनक रोज़गार दिया जा रहा है।
घर की ज़िम्मेदारी और खुद की आत्मनिर्भरता की पहचान
इस संस्थान की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहाँ काम करने वाली महिलाएँ अब अपने घर की आर्थिक ज़रूरतों में हाथ बटा रही हैं।
-बच्चों की पढ़ाई: अब इन माताओं को बच्चों की स्कूल फीस के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
-खुद का खर्च: अपनी मेहनत की कमाई से ये महिलाएँ न सिर्फ घर चला रही हैं, बल्कि खुद का भविष्य भी संवार रही हैं।
-सशक्त समाज: जब एक महिला कमाती है, तो उसका पूरा परिवार और आने वाली पीढ़ी सशक्त होती है।
बेहतरीन क्वालिटी, प्रशिक्षित कारीगरों का बेहतरीन काम
दास मैन्युफैक्चरिंग में केवल रोज़गार ही नहीं दिया जाता, बल्कि यहाँ तैयार होने वाले लोअर, टी-शर्ट और अन्य गारमेंट्स की क्वालिटी का भी खास ख्याल रखा जाता है। प्रोप्राइटर धर्मराज सिंह राठौर के कुशल नेतृत्व में यह कंपनी वाराणसी में कपड़ों के व्यापार में अपनी एक अलग पहचान बना रही है।
दास मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेडर्स
"हमारा उद्देश्य केवल व्यापार करना नहीं, बल्कि अपनी मातृशक्ति को वह मंच देना है जहाँ वे गर्व से कह सकें कि हम आत्मनिर्भर हैं।" — दास मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेडर्स
दास मैन्युफैक्चरिंग-महिलाओं को दे रहा स्वरोजगार का मंच
अगर समाज का हर सक्षम व्यक्ति इसी तरह अपने क्षेत्र में छोटे-छोटे रोज़गार के अवसर पैदा करे, तो भारत को 'आत्मनिर्भर' बनने से कोई नहीं रोक सकता। वाराणसी की इन महिलाओं का जज्बा आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है।
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