वाराणसी|
भारतीय डाक विभाग द्वारा आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दिनांक 02.04.2026 को काशी विद्यापीठ परिसर स्थित डाकघर में “नेक्स्ट जेनरेशन डाकघर (N-Gen Post Office)” का शुभारंभ किया गया। इस आधुनिक डाकघर का उद्घाटन सुश्री पद्मगन्धा मिश्रा, पोस्टमास्टर जनरल, वाराणसी क्षेत्र तथा श्री प्रो. आनंद कुमार त्यागी, कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
N-Gen Post Office परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम
इस अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल, वाराणसी क्षेत्र ने अपने संदेश में कहा कि यह पहल, माननीय केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के दृष्टिकोण से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य डाकघरों को जीवंत, विद्यार्थी-केंद्रित, प्रौद्योगिकी-सक्षम स्थानों के रूप में पुनर्परिभाषित करना है जो वास्तव में नई पीढ़ी के युवाओ व छात्रों के साथ तालमेल बिठाते हैं। N-Gen Post Office परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम है। इस आधुनिक डाकघर की विशेषता यह है कि यहां छात्र-छात्राएं न केवल डाकघर की सेवाएँ प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि एक अनुकूल वातावरण में बैठकर चाय-कॉफी का आनंद भी ले सकते हैं। इसके लिए डाकघर परिसर में आरामदायक टेबल और कुर्सी की व्यवस्था की गई है, जिससे युवा व छात्र मिनी लाइब्रेरी, टीवी, वीडियो गेम, शतरंज, कैरम आदि की सुविधा प्राप्त कर सकते है । भारतीय डाक विभाग, जो सदियों से लोगों को जोड़ने का कार्य करता आया है, अब डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग, ई-कॉमर्स और वैश्विक कनेक्टिविटी के माध्यम से नए युग में प्रवेश कर चुका है। N-Gen डाकघर इसी परिवर्तन की अगली कड़ी है, जिसे विशेष रूप से युवा पीढ़ी और छात्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
युवा नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि भविष्य का उद्यमी, नवाचारकर्ता और राष्ट्र निर्माता
उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि भविष्य का उद्यमी, नवाचारकर्ता और राष्ट्र निर्माता है। इस दृष्टि से यह डाकघर छात्रों को उनके स्टार्ट-अप, ऑनलाइन व्यवसाय और नवाचारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस N-Gen डाकघर में ग्राहकों को डिजिटल डाक सेवाएं, स्पीड पोस्ट एवं पार्सल सेवाएं, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग सेवाएं तथा इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस स्थान को छात्रों के अनुकूल क्षेत्र के रूप में परिकल्पित किया गया है—एक ऐसी जगह जहाँ कोई केवल डाक संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ही नहीं, बल्कि जुड़ने, सहयोग करने और रचनात्मक कार्य करने के लिए भी आ सकता है। चाहे वह देश भर में या विदेश में महत्वपूर्ण दस्तावेज़ भेजना हो या डिजिटल सेवाओं का उपयोग करना हो, दोस्तों के साथ समय बिताना हो,वाई-फाई का उपयोग करना हो, गेम खेलना हो या किताबें और पत्रिकाएँ पढ़ने के लिए मिनी-लाइब्रेरी का आनंद लेना हो।
पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि इंडिया पोस्ट देश के सबसे बड़े और विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में से एक है, जिसके माध्यम से देश के सुदूर क्षेत्रों तथा विदेशों तक भी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि यदि उनके पास कोई नवाचार या स्टार्ट-अप विचार है, तो उसे विश्व स्तर तक पहुंचाने में इंडिया पोस्ट उनका प्रभावी सहयोगी बनेगा।
छात्रों एवं शिक्षकों को आधुनिक सेवाओं का मिलेगा लाभ
उन्होंने काशी विद्यापीठ प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्थान में N-Gen Post Office की स्थापना से छात्रों एवं शिक्षकों को आधुनिक सेवाओं का लाभ मिलेगा तथा यह नवाचार को प्रोत्साहित करने में सहायक सिद्ध होगा।
डाक विभाग का युवाओं के प्रति एक नई सोच और सुविधा का प्रतीक
मुख्य अतिथि प्रो. ए.के. त्यागी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है वाराणसी डाक परिक्षेत्र का प्रथम ‘नेक्स्ट जेन पोस्ट ऑफिस’ महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रांगण में स्थापित हुआ है आगे उन्होंने कहा कि यह डाक विभाग का युवाओं के प्रति एक नई सोच और सुविधा का प्रतीक है। इससे युवाओं का डाक विभाग के प्रति जुड़ाव और भी सुदृढ़ होगा। उन्होंने इंडिया पोस्ट की पहल की तारीफ़ की।
अतिथियों एवं सहयोगियों का आभार
विभाग के अधिकारियों ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति, विश्वविद्यालय प्रशासन तथा छात्र-छात्राओं को उनके जोश और सहयोग के लिए धन्यवाद किया I कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी उपस्थित अतिथियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।महात्मा गाँधी कशी विद्यापीठ का नया डाकघर अब युवा सशक्तिकरण, संस्थागत सहयोग और लोक सेवा आधुनिकीकरण का प्रतीक बन गया है।कार्यक्रम में डाक विभाग एवं विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
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