Khabarilaal News Desk :

Supreme Court of India ने मानव जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने रेबीज से संक्रमित, लाइलाज बीमारी से ग्रस्त और गंभीर रूप से खतरनाक आवारा कुत्तों को जान से मारने (यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद भारत उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां विशेष परिस्थितियों में आवारा कुत्तों को मारने की कानूनी अनुमति है।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?

जस्टिस Vikram Nath, Sandeep Mehta और N. V. Anjaria की पीठ ने कहा कि जिन इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है और लगातार कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहां स्थानीय प्रशासन आवश्यक कदम उठा सकता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के आकलन के बाद और Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 तथा Animal Birth Control Rules, 2023 के तहत ही की जाएगी।

मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार में यह भी शामिल है कि नागरिक कुत्तों के हमलों के भय से मुक्त होकर जीवन जी सकें।”

कोर्ट ने यह भी माना कि बच्चों, बुजुर्गों और विदेशी पर्यटकों पर आवारा कुत्तों के हमले गंभीर चिंता का विषय हैं।

किन देशों में पहले से हैं ऐसे कानून?

  • United States: कई राज्यों में रेबीज संक्रमित और खतरनाक कुत्तों को इच्छामृत्यु देने की अनुमति है।
  • Russia: सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा होने पर आवारा कुत्तों को मारने की इजाजत है।
  • Japan: शेल्टर में तय समय तक गोद न लिए जाने पर कुत्तों को euthanasia दी जा सकती है।
  • India: अब विशेष परिस्थितियों में यही व्यवस्था लागू होगी।

क्यों जरूरी पड़ा यह फैसला?

देशभर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और रेबीज के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। खासकर Delhi समेत कई शहरों में बच्चों पर हमलों की घटनाओं के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।

क्या होगा आगे?

सुप्रीम Court ने राज्यों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि वे:

  • आवारा कुत्तों के लिए बेहतर शेल्टर बनाएं
  • नसबंदी कार्यक्रम तेज करें
  • रेबीज नियंत्रण अभियान चलाएं
  • और जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत यूथेनेशिया लागू करे
 
 
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