वाराणसी। प्रमुख सचिव, कृषि के निर्देश पर जिले में स्थापित औद्योगिक संस्था जैसे-कैटल फीड, कुक्कुट फीड, साबुन, पेंट, बार्निस, मुद्रण स्याही, लिबास चादरें, प्लाईवूड, लेमिन बार्ड, पार्टीकल बोर्ड, चीनी/शीरे के किण्वन से एल्कोहल निर्माण, डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड आदि के निर्माण में प्रयोग किये जा रहे अनुदानित यूरिया की जांच कर अनुदानित यूरिया के प्रयोग किये जाने पर सम्बन्धित फर्मो पर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित किये जाने हेतु गुरुवार को उर्वरक निरीक्षक एवम् उद्योग विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर जनपद में छापे की कार्यवाही की गयी।
जिलाधिकारी के निर्देश के बाद किया गया टीम का गठन
बताते चलें कि जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के आदेश के क्रम में टीम का गठन किया गया। टीम-1 में जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह एवं उद्योग विभाग के सहायक प्रबंधक श्रीपाल जिनको तहसील-सदर टीम-2 मे जिला कृषि रक्षा अधिकारी बृजेश विश्वकर्मा एवम् उद्योग विभाग के सहायक आयुक्त ध्रुव सिंह जिनको तहसील-राजातालाब तथा टीम-3 में उप सम्भागीय कृषि प्रसार अधिकारी-सदर निरूपमा सिंह, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप-1 रोहित कुमार सिंह, एवम् उद्योग विभाग के सहायक प्रबंधक संजय सिंह जिनको तहसील-पिण्डरा आवंटित किया गया।
टेक्निकल ग्रेड यूरिया का लिया गया नमुना
छापे के दौरान कुल 06 औद्योगिक इकाईयों एवं उनके गोदामों का गहन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान 02 टेक्निकल ग्रेड यूरिया का नमूना लिया गया, जिसको परीक्षण हेतु निर्दिष्ट प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है। परीक्षण परिणाम प्राप्त होने पर नियमानुसार अग्रेत्तर कार्यवाही की जायेगी।
अनुदानित यूरिया का कदापि न करें प्रयोग
जनपद के समस्त औद्योगिक संस्था जैसे-कैटल फीड, कुक्कुट फीड, साबुन पेंट, बार्निस, मुद्रण स्याही, लिबास चादरें, प्लाईवूड, लेमिन बार्ड, पार्टीकल बोर्ड के निर्माण के प्रोपराइटर को निर्देशित किया गया है कि जिन भी उत्पाद में यूरिया का प्रयोग किया जाता है, उसमें अनुदानित यूरिया का प्रयोग कदापि न करें अन्यथा निरीक्षण/परीक्षण में यह पाया जाता है कि आप द्वारा अनुदानित यूरिया का प्रयोग किया जा रहा है तो नियमानुसार उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। अबैध रूप से उर्वरकों की कालाबाजारी करने वाले बिक्रेताओं के विरूद्ध यह अभियान निरंतर चलता रहेगा। वर्तमान समय में जनपद में समस्त उर्वरक उपलब्ध है। जनपद के प्रत्येक क्षेत्र में उर्वरक की कोई कमी नही है।
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