VARANASI NEWS:-लमही में गूंजी प्रेमचंद की ‘स्वामिनी’, साहित्यिक विमर्श में उठे स्त्री अस्मिता और अधिकारों के सवाल
khabarilaal news desk
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद की जन्मभूमि लमही में आयोजित साप्ताहिक साहित्यिक कार्यक्रम “सुनो मैं प्रेमचंद” के 1917वें दिवस पर प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘स्वामिनी’ का पाठन एवं विचार-विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट द्वारा किया गया।
प्रो. महेंद्र मोहन वर्मा ने किया कार्यक्रम में कहानी का पाठन
कार्यक्रम में कहानी का पाठन प्रो. महेंद्र मोहन वर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ. मनोहर लाल ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों की सबसे बड़ी ताकत उनके जीवंत पात्र होते हैं। उन्होंने बताया कि ‘स्वामिनी’ एक ऐसे मध्यवर्गीय परिवार की कहानी है, जहाँ संबंधों की कड़वाहट और अधिकारों की जंग मुख्य धुरी बनकर उभरती है। प्रेमचंद ने इस कथा के माध्यम से यह दर्शाया है कि एक स्त्री को घर में ‘स्वामिनी’ अर्थात मालकिन का दर्जा तो दे दिया जाता है, लेकिन वास्तव में उसे निर्णय लेने और अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने का अधिकार नहीं मिलता। कहानी में पारिवारिक कलह, संपत्ति विवाद और स्त्री अस्मिता के प्रश्नों को अत्यंत संवेदनशीलता और सलीके से बुना गया है।
प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी समाज की वास्तविकताओं को जीवंत रूप में करती हैं प्रस्तुत
कार्यक्रम में उपस्थित एसडीएम (सदर) नीतीश सिंह ने भी कहानी का श्रवण किया और कहा कि प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी समाज की वास्तविकताओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं।कार्यक्रम की शुरुआत उपन्यास सम्राट प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इस अवसर पर विनोद कुमार वर्मा ने प्रेमचंद को समर्पित काव्यपाठ प्रस्तुत किया।
राजीव गोंड ने किया धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम में मुख्य रूप से मनीष सिंह, अभिषेक जायसवाल, पवन वर्मा, पंकज, धीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, राजेश कुमार श्रीवास्तव, विपनेश सिंह, संजय श्रीवास्तव, प्रांजल श्रीवास्तव, संगीत श्रीवास्तव, समीक्षा त्रिपाठी, आलोक शिवाजी, मनोज श्रीवास्तव, राहुल यादव, रोहित गुप्ता, राधेश्याम पासवान सहित अनेक साहित्यप्रेमी, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन आयुषी दूबे ने किया। स्वागत रोहित गुप्ता तथा धन्यवाद ज्ञापन राजीव गोंड ने किया।
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