वाराणसी।करखियाव स्थित अमूल प्लांट के मुख्य गेट के सामने शनिवार को सुबह से लेकर दोपहर तक मजदूरों ने आर्थिक शोषण करने व मनमाने ढंग से काम कराने का आरोप लगाकर खूब हंगामा किया । सूचना पर एडीसीपी व इंस्पेक्टर फूलपुर मय फोर्स पहुच स्थिति को संभाला। सायंकाल तक धरना प्रदर्शन जारी रहा।

मजदूरों ने आर्थिक शोषण करने व अपनी बात रखने पर कम्पनी से बाहर कर देने की धमकी देने का लगाया आरोप

अमूल प्लांट में कार्यरत सैकड़ो मजदूर ठीकेदार व अमूल कम्पनी के ऊपर मनमाने तरीके से काम कराने व महीने के पूरे दिन बिना छुट्टी दिए आर्थिक शोषण करने व अपनी बात रखने पर कम्पनी से बाहर कर देने का आरोप लगाया। यही नही मजदूरों का आरोप था कि रखते समय दो वर्ष में मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया था लेकिन कुछ नही किये। मांग करने पर बाहर कर दिया जा रहा है। 

महिलाओं ने लगाया आरोप हमसे पुरुषों के बराबर कराया जाता है काम

महिलाओं का आरोप था कि हमसे पुरुष के बराबर काम लिया जाता है। लेकिन मजदूरी उनसे कम दिया जाता है। किसी भी तरह की कोई छुट्टी नही दी जाती है। मजदूरों ने दूध से लदी गाड़ियों को न तो अंदर जाने दिया जा रहा था ना ही बाहर निकलने दिया जा रहा था। जिससे प्लांट के अंदर अफरा तफरी का माहौल दिखा।

सूचना के बाद मौके पर पहुंचे एडीसीपी गोमतीजोन

सूचना पर गोमती जोन के एडीसीपी नृपेंद्र कुमार व इंस्पेक्टर अतुल कुमार सिंह मयफोर्स मौके पर पहुचे। काफी देर तक समझाने का प्रयास किया लेकिन मजदूर नही माने। उसके बाद प्लांट के मैनेजर अलोकमणि त्रिपाठी ठेकेदार के सुपरवाइजर विनोद दुबे के साथ मौके पर आए। लेकिन मजदूरो के तर्क के आगे उनकी भी नही चली। अंत मे सायं 6 बजे गुजरात से ठीकेदार के आने पर वार्ता उपरांत धरना प्रदर्शन समाप्त करने की बात कही। वही धरना प्रदर्शन के चलते प्लांट का कार्य भी बाधित रहा।इस बाबत इंस्पेक्टर फूलपुर ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। 

धरना प्रदर्शन के दौरान श्रम विभाग पर भी उठे प्रश्न

अमूल प्लांट में मजदूरों को रखने वाली संस्था श्रम विभाग में रजिस्टर्ड होने के बावजूद कभी कोई जानकारी न लेना और मजदूरों से यह पूछने तक कोई जहमत उठाई की कब और कितने घण्टे कितने रुपये में काम करते है?।

किसी भी मजदूर को नहीं मिलती है मेडिकल की कोई सुविधा 

मजदूरो का आरोप था कि श्रम विभाग के लोग ठीकेदार से मिले हुए और नियमो के विरुद्ध वर्षो से मजदूरो को बिना कोई मेडिकल सुबिधा और पी एफ के 12- 12 घण्टे बिना कोई छुट्टी दिए काम कराया जाता है। जबकि श्रम विभाग ही 8 घण्टे और हफ्ते में 6 दिन काम करने का नियम बनाया है। ऐसे में प्लांट में इन नियमो का पालन क्यो नही कराया गया। 

प्लांट मैनेजर आलोक मणि त्रिपाठी ने कहा मजदूरों का प्लान्ट से कोई संबंध नहीं

वही दूसरी तरफ प्लांट के मैनेजर अलोकमणि त्रिपाठी ने बताया कि मजदूरो का प्लांट से कोई संबध नही है हम ठीकेदारी व्यवस्था के तहत काम कराते है। ठीकेदार कितना देता है हम नही जानते।

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