Khabarilaal News Desk :
Pakistan ने बलूचिस्तान में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने बलूचिस्तान के खनिज-समृद्ध क्षेत्रों में अतिरिक्त अर्धसैनिक बल तैनात करने का आदेश दिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम खनिज संपदा की सुरक्षा के लिए उठाया गया है, लेकिन बलूच संगठनों और मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि यह संसाधनों पर कब्जा मजबूत करने की कोशिश है।
बलूचिस्तान क्यों है इतना अहम?
Pakistan के दक्षिण-पश्चिम में स्थित Balochistan प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, यहां के अप्रयुक्त खनिज भंडार की कीमत 1 से 6 ट्रिलियन डॉलर तक आंकी जाती है।
इनमें शामिल हैं:
- सोना (Gold)
- तांबा (Copper)
- कोयला (Coal)
- क्रोमाइट (Chromite)
- Rare Earth Elements (दुर्लभ-मृदा तत्व)
विशेष रूप से Reko Diq और Saindak खदानें दुनिया की सबसे बड़ी तांबा-सोना परियोजनाओं में गिनी जाती हैं।
क्वेटा में हुई हाई-लेवल बैठक
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने Quetta पहुंचकर सुरक्षा मामलों की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इसके बाद सरकार ने Rakshan Division में Frontier Corps की अतिरिक्त तैनाती का फैसला किया।
सरकार ने “Mineral Security Corridor” बनाने की भी घोषणा की है, जिसमें:
- अतिरिक्त अर्धसैनिक बल
- राजमार्गों पर सुरक्षा चौकियां
- निगरानी तंत्र (Surveillance System)
शामिल होंगे।
बलूच विद्रोही क्यों नाराज हैं?
खनिज संपदा से भरपूर बलूचिस्तान दशकों से विद्रोह का केंद्र रहा है। Baloch Liberation Army (BLA) सहित कई अलगाववादी गुट लगातार पाकिस्तानी सेना और विदेशी कंपनियों को निशाना बना रहे हैं।
इन समूहों का कहना है कि बलूचिस्तान के संसाधनों पर पहला अधिकार स्थानीय लोगों का है, लेकिन पाकिस्तान सरकार और सेना इसे विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर “लूट” रही है।
हालिया हमले ने बढ़ाई चिंता
पिछले महीने Chagai जिले में पाकिस्तानी कंपनी National Resources Private Limited की खनन साइट पर हमला हुआ, जिसमें 10 लोगों की मौत हुई थी।
इस घटना के बाद सरकार ने सुरक्षा और कड़ी करने का फैसला लिया।
विदेशी कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी
बलूचिस्तान में कनाडाई कंपनी Barrick Gold की Reko Diq Project में 50% हिस्सेदारी है।
हालांकि कंपनी ने सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता जताई है, लेकिन पाकिस्तान का दावा है कि विदेशी निवेशक परियोजनाओं के लिए प्रतिबद्ध हैं।
क्या बढ़ेगा टकराव?
विशेषज्ञों का मानना है कि खनिज संपदा के दोहन और सैन्य तैनाती से बलूचिस्तान में तनाव और बढ़ सकता है। यदि स्थानीय लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया, तो आने वाले समय में यह पाकिस्तान के लिए बड़ा आंतरिक संकट बन सकता है।
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