Khabarilaal News Desk :
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिले चीन निर्मित PL-15E मिसाइल के मलबे को लेकर नई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भारतीय विशेषज्ञों ने इसके कई तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण किया है। माना जा रहा है कि इस अध्ययन से भारत को चीन की एडवांस एयर-टू-एयर मिसाइल तकनीक और उसके काम करने के तरीके को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
Operation Sindoor के दौरान मिला था PL-15E का मलबा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पंजाब के होशियारपुर क्षेत्र में चीन निर्मित PL-15E मिसाइल के हिस्से मिले थे। बताया जाता है कि इनमें से कुछ हिस्से अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में थे, जिससे तकनीकी अध्ययन संभव हो पाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हथियारों के अवशेष भविष्य की रक्षा रणनीतियों और जवाबी तकनीक विकसित करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
क्या है PL-15E Missile की खासियत?
PL-15E को चीन की लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली आधुनिक मिसाइलों में गिना जाता है। इसकी अनुमानित रेंज 100 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है और यह एक्टिव रडार गाइडेंस तकनीक का उपयोग करती है।
मिसाइल को दुश्मन के विमान को लंबी दूरी से ट्रैक करने और निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
Indian Defence Programs को मिल सकता है फायदा?
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस विश्लेषण से भारतीय रक्षा अनुसंधान कार्यक्रमों, विशेष रूप से भविष्य की एयर-टू-एयर मिसाइलों और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम के विकास में इनपुट मिल सकता है।
हालांकि रक्षा एजेंसियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
Astra Mk-2 Program पर नजर
विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी स्वदेशी मिसाइल परियोजनाओं को लगातार मजबूत कर रहा है। ऐसे में विदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमताओं और सीमाओं को समझना नई तकनीक विकसित करने में मददगार हो सकता है।
Electronic Warfare Systems की बढ़ सकती है क्षमता
यदि किसी मिसाइल के रडार, गाइडेंस और जैमिंग-रोधी तकनीक को समझ लिया जाए, तो भविष्य में उसके खिलाफ बेहतर जवाबी प्रणाली विकसित करना आसान हो सकता है। यही वजह है कि दुनिया भर की रक्षा एजेंसियां विरोधी देशों के हथियारों का तकनीकी विश्लेषण करती हैं।
Pakistan की रक्षा खरीद में China की बड़ी भूमिका
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान की सैन्य जरूरतों का बड़ा हिस्सा चीन से पूरा होता है, जिसमें फाइटर जेट्स, मिसाइलें और अन्य रक्षा उपकरण शामिल हैं।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
PL-15E मिसाइल को लेकर सामने आए दावों पर अभी तक भारत की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में तकनीकी विश्लेषण से जुड़े कई दावे स्वतंत्र सत्यापन की प्रतीक्षा में हैं।
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