वाराणसी | महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र विभाग में शनिवार को महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उनके विचारों और समाज सुधार में योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। 

मन में दृढ़ संकल्प हो, तो बंधनों को तोड़कर भी ला सकता है परिवर्तन

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. रमाकांत सिंह ने कहा कि यदि व्यक्ति के मन में दृढ़ संकल्प हो, तो वह सामाजिक बंधनों को तोड़कर भी परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले के जीवन और संघर्षों को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि उन्होंने उस समय समाज में व्याप्त छुआछूत, जातिगत भेदभाव और अशिक्षा के खिलाफ आवाज उठाई, जब ऐसा करना अत्यंत साहस का कार्य था। 

शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम माना

प्रो. सिंह ने यह भी कहा कि  और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम माना उनका व्यक्तित्व और कृतित्व हम सभी के लिए अनुकरणीय है।कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन डॉ. ध्यानेंद्र कुमार मिश्र ने किया, जबकि संचालन डॉ. राजेंद्र यादव द्वारा किया गया। अंत में अजीत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर डॉ. वीणा वादिनी अर्याल, डॉ. रमेश प्रजापति, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. ज्योत्सना राय, डॉ. पवन कुमार सिंह, शिखा राय, सुनिधि, पूजा, नंदिनी, प्रियंका, रितेश सहित कई छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

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