वाराणसी | महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पर्यटन अध्ययन संस्थान में विश्व विरासत दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। छात्र-छात्राओं ने सारनाथ में जागरूकता अभियान चलाकर विरासत संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में आपदाओं के दौरान सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर लिया भाग
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पर्यटन अध्ययन संस्थान में विश्व विरासत दिवस के अवसर पर ‘आपदाओं के संदर्भ में विरासत के लिए आपातकालीन प्रक्रिया’ विषय पर एक विस्तृत एवं जागरूकता आधारित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की निदेशक प्रो. भारती रस्तोगी ने की, जिसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
संस्थान के विद्यार्थियों ने सारनाथ पहुंचकर दी सक्रिय सहभागिता दी
इस अवसर पर संस्थान के विद्यार्थियों ने सारनाथ पहुंचकर सक्रिय सहभागिता और देश-विदेश से आए पर्यटकों को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, भूकंप, बाढ़, अग्निकांड जैसी प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के कारण अनेक ऐतिहासिक धरोहरें और सांस्कृतिक परंपराएं संकट में हैं। ऐसे में इनकी सुरक्षा के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।
छात्र-छात्राओं ने पोस्टर प्रस्तुति, समूह चर्चा और संवाद के माध्यम से यह विस्तार से समझाया
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने पोस्टर प्रस्तुति, समूह चर्चा और संवाद के माध्यम से यह विस्तार से समझाया कि आपातकालीन परिस्थितियों में किस प्रकार विरासत स्थलों की रक्षा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन की उचित योजना, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से इन अमूल्य धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
विरासत केवल भौतिक संरचनाओं तक सीमित नहीं
संस्थान की सहायक आचार्य एवं प्लेसमेंट ऑफिसर डॉ. ज्योतिमा सिंह ने अपने संबोधन में विभिन्न कलाकृतियों और धरोहरों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विरासत केवल भौतिक संरचनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी परंपराओं, ज्ञान, जीवनशैली और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है, जिसे सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
प्रशासन ने इसे बताया एक सार्थक और प्रेरणादायक प्रयास
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। विद्यार्थियों की इस पहल की सराहना करते हुए संस्थान प्रशासन ने इसे एक सार्थक और प्रेरणादायक प्रयास बताया।
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