देश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देते हुए केंद्र सरकार ने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि नए भारत की एमएसएमई क्रांति के केंद्र में नारी शक्ति की अहम भूमिका है।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जो महिलाओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी
देश में महिला उद्यमियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ और ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ के जरिए 3.11 करोड़ से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यम पंजीकृत हो चुके हैं। कुल एमएसएमई में करीब 40% हिस्सेदारी महिलाओं की है, जो रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
रोजगार और आर्थिक विकास में योगदान
फिलहाल एमएसएमई क्षेत्र देश में लाखों लोगों को रोजगार दे रहा है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में लाखों नए रोजगार सृजित होने की संभावना है, जिससे युवाओं और खासकर महिलाओं को बड़ा लाभ मिलेगा।
सरकारी योजनाओं से मिल रहा सहारा
सरकार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत 3.2 लाख से अधिक महिला उद्यमियों को सहायता दी गई है। साथ ही, महिलाओं को ऋण देने के लिए क्रेडिट गारंटी फंड के तहत 90% तक गारंटी कवर दिया जा रहा है।
सरकारी खरीद नीति में भी महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों को कम से कम 3% खरीद महिला उद्यमियों से करना अनिवार्य किया गया है।
कौशल और नवाचार पर जोर
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्किल डेवलपमेंट, मार्केटिंग सहायता और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ‘यशस्विनी अभियान’ और अन्य योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को जागरूक और सक्षम बनाया जा रहा है।
विकसित भारत’ में नारी शक्ति की भूमिका
शोभा करंदलाजे ने कहा कि भारत का एमएसएमई सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें महिलाओं की भागीदारी देश को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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