वाराणसी | काशी की पावन नगरी में अक्षय तृतीया पर्व के दूसरे दिन मंगलवार को आस्था और श्रद्धा का भव्य नजारा देखने को मिला। हजारों श्रद्धालुओं ने मणिकर्णिका घाट स्थित पवित्र चक्र पुष्करिणी कुंड में स्नान कर अक्षय पुण्य की कामना की।
मां मणिकर्णिका की अष्टधातु प्रतिमा का विधि-विधान से दर्शन-पूजन
बताते चले की श्रद्धालुओं ने कुंड में पवित्र डुबकी लगाने के बाद मां मणिकर्णिका की अष्टधातु प्रतिमा का विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो |
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा के अवतरण से पहले ही इस पवित्र कुंड का था अस्तित्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काशी खंड में उल्लेख मिलता है कि गंगा के अवतरण से पहले ही इस पवित्र कुंड का अस्तित्व था। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने देवाधिदेव शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां हजारों वर्षों तक तपस्या की थी। भगवान शिव और माता पार्वती के स्नान हेतु भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से इस कुंड की स्थापना की थी।
स्नान के दौरान माता पार्वती का इसी कुंड में गिरा था कर्ण कुंडल
पौराणिक कथा के अनुसार, स्नान के दौरान माता पार्वती का कर्ण कुंडल इसी कुंड में गिर गया था, जिसके कारण इस स्थान का नाम ‘मणिकर्णिका’ पड़ा। अक्षय तृतीया के दिन इस कुंड में स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।
चारों धाम के समान मिलता है पुण्य
मान्यता है कि इस पवित्र कुंड में स्नान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है और चारों धाम के समान पुण्य मिलता है। इसी आस्था और विश्वास के चलते हर वर्ष इस अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है।
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