खबरीलाल न्यूज डेक्स
वाराणसी। लहुराबीर स्थित आवासीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर व्यापक सवाल उठाए। इस दौरान उनके साथ श्रीमती रीना राय भी मौजूद रहीं।
महिलाओं के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और वास्तविक सशक्तिकरण को लेकर एक बड़ा विमर्श
यह प्रेस वार्ता केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और वास्तविक सशक्तिकरण को लेकर एक बड़ा विमर्श बनकर सामने आई, जिसमें व्यक्तिगत, सामाजिक और संवैधानिक—तीनों स्तरों को जोड़ते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया गया।
प्रधानमंत्री को अजय राय की खुली चुनौती
इस दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में महिला सम्मान और ‘नारी शक्ति वंदन’ की बात करते हैं, तो उन्हें अपनी पत्नी जसोदा बेन को साथ लेकर काशी आना चाहिए। उन्होंने कहा, “जैसे मेरी पत्नी रीना राय मेरे साथ बैठी हैं, वैसे ही काशीवासी चाहते हैं कि प्रधानमंत्री भी अपनी पत्नी को साथ लेकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन करें। तभी यह माना जाएगा कि उनके मन में महिलाओं के प्रति सच्चा सम्मान है।
“जशोदाबेन को न्याय कब?-अजय राय
प्रेस वार्ता की शुरुआत में ही अजय राय ने देश के सामने एक सीधा और असहज सवाल रखा—“जब देश में ‘नारी सम्मान’ और ‘नारी शक्ति’ की बात होती है,तो प्रधानमंत्री जी की पत्नी जशोदाबेन मोदी को आज तक वह अधिकार और सम्मान क्यों नहीं मिला?”उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतीक है जिसमें महिलाओं को अधिकार देने की बात तो की जाती है, लेकिन व्यवहार में उन्हें पीछे रखा जाता है।देश का सर्वोच्च पद संभालने वाला व्यक्ति अगर अपने निजी जीवन में ही एक महिला के साथ न्याय नहीं कर पाया,तो उसके ‘नारी सशक्तिकरण’ के दावे कितने विश्वसनीय हैं?”
विवाह, अधिकार और सामाजिक जिम्मेदारी
अजय राय ने भारतीय समाज की परंपरा और मूल्यों का हवाला देते हुए कहा—विवाह केवल एक औपचारिक रिश्ता नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है,एक पत्नी को केवल नाम से नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और समान भागीदारी से पहचान मिलती है,क्या किसी महिला को सिर्फ कागज पर ‘पत्नी’ मान लेना ही पर्याप्त है?या उसे जीवन में वह स्थान भी मिलना चाहिए, जो उस रिश्ते का मूल अधिकार है?उन्होंने कहा कि जशोदाबेन का मामला आज लाखों महिलाओं की स्थिति का प्रतीक बन गया है, जो अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं।
महिला आरक्षण: “इतिहास या इंतजार?”
अजय राय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा—सितंबर 2023 में संसद से पारित,राष्ट्रपति की मंजूरी भी प्राप्त,लेकिन आज तक लागू नहीं,अगर यह ऐतिहासिक कानून था, तो इसे लागू करने में ढाई साल क्यों लग गए?क्या यह महिलाओं को अधिकार देने की सच्ची इच्छा थी, या सिर्फ राजनीतिक रणनीति?”उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार देने का वादा किया गया, लेकिन उन्हें केवल इंतजार और भ्रम मिला।
परिसीमन से जोड़ना: “हक को टालने की रणनीति”
अजय राय ने आरोप लगाया कि 2026 में महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना एक सोची-समझी चाल है— लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने की चर्चा,जनगणना और परिसीमन को अनिवार्य शर्त बनाना और उसके बाद ही आरक्षण लागू करना“यह साफ संकेत है कि सरकार महिलाओं को उनका अधिकार तुरंत नहीं देना चाहती।यह नारी सम्मान नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन है।”
कांग्रेस का पक्ष: “समर्थन हमेशा, राजनीति कभी नही
उन्होंने कहा कि 2010 में कांग्रेस सरकार ने महिला आरक्षण को आगे बढ़ाया 2023 में भी कांग्रेस ने संसद में इसका समर्थन किया आज भी कांग्रेस की मांग—बिना शर्त तत्काल लागू करो“हमने कभी महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया,हमने सिर्फ इसे टालने की राजनीति का विरोध किया है।”
OBC महिलाओं की अनदेखी पर सवाल
अजय राय ने महिला आरक्षण के भीतर सामाजिक न्याय का मुद्दा उठाते हुए कहा—“SC और ST के लिए प्रावधान हैं, लेकिन OBC महिलाओं के लिए स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं?”उन्होंने कहा कि सच्चा सशक्तिकरण तभी संभव है जब हर वर्ग की महिलाओं को समान अवसर और प्रतिनिधित्व मिले।
महिला सुरक्षा: जमीनी हकीकत पर प्रहार
अजय राय ने देश में महिला सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कई घटनाओं का उल्लेख किया—बिलकिस बानो मामला के दोषियों की रिहाई, मणिपुर हिंसा के दौरान महिलाओं के साथ हुई घटनाएं जब देश में महिलाओं के साथ ऐसी घटनाएं होती हैं और सरकार चुप रहती है,तो ‘नारी सम्मान’ के नारे खोखले लगते हैं।”
नारी शक्ति” या “राजनीतिक सुविधा?
अजय राय ने भाजपा के अभियान पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा—“जहां राजनीतिक फायदा है, वहां ‘नारी शक्ति’ की बात होती है,और जहां जिम्मेदारी निभानी होती है, वहां चुप्पी साध ली जाती है।यह सशक्तिकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक सुविधा का इस्तेमाल है।
निजी जीवन बनाम सार्वजनिक दावे
अजय राय ने अपने बयान के सबसे तीखे हिस्से में कहा—एक तरफ प्रधानमंत्री जी देश को ‘नारी शक्ति’ का संदेश देते हैं,| दूसरी तरफ उनकी अपनी पत्नी को ही वह सम्मान नहीं मिला, जो एक भारतीय महिला का अधिकार है।यह विरोधाभास देश की महिलाओं के सामने एक बड़ा प्रश्न खड़ा करता है।”
“घोषणाओं से नहीं, न्याय से
“कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में थी, है और रहेगी।लेकिन महिलाओं के अधिकारों के नाम पर किसी भी तरह का राजनीतिक धोखा स्वीकार नहीं किया जाएगा।”“नारी शक्ति का सम्मान भाषणों, नारों और अभियानों से नहीं,बल्कि ठोस फैसलों, पारदर्शिता और ईमानदार क्रियान्वयन से होता है।
पहलगाम मे आतंकी हमला मानवता, शांति और इंसानियत पर एक बेहद क्रूर प्रहार
पत्रकार वार्ता के अंत में पहलगाम मे आतंकी हमला मानवता, शांति और इंसानियत पर एक बेहद क्रूर प्रहार था। इस अमानवीय घटना ने न केवल कई परिवारों से उनके अपने छीन लिए, बल्कि पूरी मानवता को गहरे दुख और पीड़ा से भर दिया था।इस निर्मम हमले में अपनी जान गंवाने वाले सभी निर्दोष नागरिकों को दो मिनट का मौन रखकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित किया गया ।
पत्रकार वार्ता के दौरान इन लोगों की रही मौजूदगी
पत्रकार वार्ता में अजय राय के अलावा उनकी धर्मपत्नी रीना राय, जिला अध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल,महानगर अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे,महिला कांग्रेस की जिला/महानगर अध्यक्ष कमशः अनुराधा यादव,पूनम विश्वशर्मा शामिल रही।
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