Khabarilaal News Desk :

दुनिया एक बार फिर बड़े जलवायु संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। मौसम वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष बनने वाला अल नीनो (El Niño) अब तक के सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक हो सकता है। इसके प्रभाव से वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है और कई देशों को भीषण गर्मी, सूखा तथा मौसम की चरम घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है।

रिकॉर्ड तोड़ सकता है नया अल नीनो

यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF) के अनुसार, मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान औसत से लगभग 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। कुछ मॉडलों में यह वृद्धि 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये अनुमान सही साबित हुए तो यह 1997-98 और 2015-16 के ऐतिहासिक अल नीनो से भी अधिक प्रभावशाली साबित हो सकता है।

क्या है अल नीनो?

अल नीनो, प्रशांत महासागर में होने वाले ENSO (El Niño-Southern Oscillation) जलवायु चक्र का गर्म चरण है। यह आमतौर पर हर दो से सात वर्षों के बीच विकसित होता है। इसके दौरान समुद्र की सतह का तापमान बढ़ जाता है, जिससे दुनिया भर में बारिश, सूखा, तूफान और तापमान के पैटर्न प्रभावित होते हैं।

खेती और जल संकट की आशंका

वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो के कारण कई क्षेत्रों में वर्षा कम हो सकती है, जिससे खेती-बाड़ी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही जल स्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है और सूखे जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

विशेषज्ञों ने चेताया है कि खाद्य सुरक्षा और जल प्रबंधन को लेकर देशों को पहले से तैयारी करनी होगी।

संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी

एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि अल नीनो पहले से गर्म होती धरती पर अतिरिक्त गर्मी का दबाव डालेगा। उन्होंने इसे जलवायु संकट की गंभीर चेतावनी बताते हुए देशों से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और जलवायु अनुकूल नीतियां अपनाने का आह्वान किया।

90 प्रतिशत तक संभावना

World Meteorological Organization के अनुसार, सितंबर से पहले अल नीनो बनने की संभावना लगभग 80 प्रतिशत है, जबकि नवंबर तक इसके सक्रिय रहने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक बताई गई है।

जलवायु कार्रवाई की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते जलवायु संकट से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर त्वरित कदम उठाने होंगे। नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।

DESK REPORTER – CHANDAN KUMAR

Link Copied to Clipboard!

Comments (0)

3 + 9 = ?
No comments yet. Be the first to share your thoughts!