Khabarilaal News Desk :
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के 19 साल पुराने आपराधिक मामले में केस रिकॉर्ड गुम होने को गंभीर लापरवाही करार देते हुए गुजरात पुलिस को 6 सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से भी विस्तृत जवाब मांगा है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केस रिकॉर्ड का गुम होना न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी लापरवाही आपराधिक न्याय प्रणाली की जड़ को कमजोर करती है।
मामला क्या है?
यह केस वर्ष 2007 में गुजरात के भीलोड़ा गांव में संपत्ति विवाद से जुड़ी कथित जालसाजी से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी अनुपस्थिति में राजस्व रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा कर नाम बदल दिया गया।
जांच में देरी और लापरवाही
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि केस से जुड़े मूल दस्तावेज और जांच रिपोर्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजते समय गुम हो गए थे, जिसके चलते दोबारा जांच करनी पड़ी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना और 2017 से लंबित जांच पर भी सवाल उठाए।
जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल
पीठ ने गुजरात सरकार से पूछा है कि रिकॉर्ड गुम होने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने इस पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्याय व्यवस्था पर असर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि जांच एजेंसियां समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं करतीं और रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रखतीं, तो इसका सीधा असर पीड़ितों के न्याय पर पड़ता है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में जांच को वर्षों तक लंबित नहीं रखा जा सकता।
आगे की कार्रवाई
कोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 6 सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। साथ ही हाईकोर्ट की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
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