Khabarilaal News Desk :
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि रविवार सुबह अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में ईरान के दो हमलावर ड्रोन को मार गिराया। अमेरिकी सेना के अनुसार ये ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।
अमेरिकी सेना ने दी जानकारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि अमेरिकी बलों ने दो "वन-वे अटैक ड्रोन" को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। सेना ने कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
पाकिस्तान की कूटनीतिक पहल
घटना ऐसे समय सामने आई है जब पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी तेहरान पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के उद्देश्य से कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हैं। हाल के सप्ताहों में यह उनका तीसरा ईरान दौरा माना जा रहा है।
हालिया घटनाओं से बढ़ा तनाव
अमेरिकी सेना ने इससे पहले भी ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को रोकने का दावा किया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार कुवैत और बहरीन की दिशा में दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया गया था।
इसके बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं और जवाबी कार्रवाइयों का सिलसिला शुरू हुआ। कुवैत और बहरीन ने भी अपने ऊपर हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों को विफल करने का दावा किया है।
आईआरजीसी ने ली जिम्मेदारी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कथित तौर पर कुवैत स्थित अली अल सलेम एयर बेस और बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर हमलों की जिम्मेदारी ली है। आईआरजीसी का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान के कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों पर हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई।
वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ा तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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