खबरीलाल न्यूज़ डेस्क
वाराणसी। प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य तथा जनपद के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने गत् 16 और 17 अप्रैल को संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध किये जाने को लेकर अन्य विपक्षी दलों पर जमकर हमला बोला है।उन्होंने कहा कि इन महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध कर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात किया है और अपनी महिला-विरोधी मानसिकता को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
नीति-निर्माण में महिलाओं को भागीदारी व उनका अधिकार देना कोई उपकार नहीं
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। साथ ही प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी, जहां के वे स्वयं प्रभारी मंत्री भी हैं, के पत्रकारों से वर्चुअल वार्ता की। स्थानीय सर्किट हाउस में जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा सहित अन्य स्थानीय जन प्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकारों को इस महत्वपूर्ण विधेयकों संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा कि नीति-निर्माण में महिलाओं को भागीदारी देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है। जिन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर में बाधा डाली है, उन्हें आने वाले चुनावों में महिलाओं के कड़े आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि दक्षिण भारत का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा और बढ़ेगा
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के झूठ को बेनकाब करते हुए स्पष्ट किया कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि दक्षिण भारत का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा और बढ़ेगा। उन्होंने हर राज्य में 50 फीसदी सीटें बढ़ाने की बात कही। समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दल कोटा के भीतर धर्म-आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रहे हैं, जो तुष्टिकरण और ध्यान भटकाने का एक तकनीकी बहाना मात्र है।
BJP महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध
भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने हेतु इन महिला-विरोधी ताकतों के खिलाफ दृढ़ता से लड़ाई लड़ेगी। लेकिन इन दो दिनों में केवल एक विधेयक ही सदन में नहीं गिरा, बल्कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके देश की आधी आबादी की नजरों में हमेशा के लिए गिर गए। इस पूरे घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि जब भी निर्णय-निर्माण में महिलाओं को समान भागीदारी देने की बात आती है, ये दल राजनीतिक बहानों और देरी की दीवारें खड़ी कर देते हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में हिस्सा देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है, जिसे कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने दशकों तक बंधक बनाए रखा।
देश की महिलाएं अब सक्रिय भागीदार में,मूक दर्शक नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि जब सभी दल एक साथ आते हैं तो ऐसे मुद्दे राजनीतिक नहीं रह जाते और देश को लाभ होता है। उन्होंने हर सांसद से व्यक्तिगत और दलगत हितों से ऊपर उठने की अपील की। प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि देश की महिलाएं अब मूक दर्शक नहीं हैं, वे सक्रिय भागीदार हैं और चुनावी परिणामों को सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। ऐसे में इस ऐतिहासिक अवसर को टालना केवल विधायी देरी नहीं, बल्कि सामाजिक और लोकतांत्रिक प्रगति का गला घोंटना है, और इसके जिम्मेदार लोगों को हर चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
परिसीमन एक संवैधानिक दायित्व,जिसके बिना सीटों का न्यायपूर्ण निर्धारण नहीं
उन्होंने बताया कि परिसीमन एक संवैधानिक दायित्व है, जिसके बिना सीटों का न्यायपूर्ण निर्धारण नहीं हो सकता। ‘‘अनुच्छेद 81 के खण्ड (3) के अनुसार, इस अनुच्छेद में ‘‘जनसंख्या’’ से आशय उस पिछली जनगणना में निर्धारित जनसंख्या से है, जिसके संबंधित आँकड़ें प्रकाशित किए जा चुके हों। अर्थात् जनसंख्या वही मानी जाएगी, जो पिछले प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्धारित हो।’’ ’’अनुच्छेद 82 के अनुसार प्रत्येक जनगणना के बाद सीटों का पुनः समायोजन किया जाता है। प्रत्येक जनगणना के पूरा होने के बाद, लोकसभा में राज्यों के लिए सीटों का पुनः समायोजन किया जाता है। प्रत्येक जनगणना के पूरा होने के बाद, लोकसभा में राज्यों के लिए सीटों का आवंटन और प्रत्येक राज्य को क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजन, संसद द्वारा कानून के माध्यम से निर्धारित प्राधिकरण और प्रक्रिया के अनुसार पुनः समायोजित किया जाएगा।’’ परिसीमन का उद्देश्य केवल सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि जनसंख्या के अनुपात में संतुलित और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
परिसीमन में देरी का मतलब महिलाओं के आरक्षण में देरी
विपक्ष यह नजरअंदाज कर रहा है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन सीधे परिसीमन से जुड़ा है, परिसीमन में देरी का मतलब महिलाओं के आरक्षण में देरी है। इतिहास गवाह है कि जिसने शाह बानो मामले में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया और तीन तलाक जैसी प्रथा का समर्थन किया, वह महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व देने के विचार को स्वीकार नहीं कर सकता।
कांग्रेस ने दशकों तक तकनीकी बहानों, समितियों और खोखली बहसों के माध्यम से महिला आरक्षण को रखा लंबित
कांग्रेस ने दशकों तक तकनीकी बहानों, समितियों और खोखली बहसों के माध्यम से महिला आरक्षण को लंबित रखा और जब भी पिछड़े वर्गों को अधिकार देने की बात आई, उसने आयोगों की रिपोर्टों को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
विधेयकों का विरोध करना वास्तव में महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास
पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देना उनके लिए आसान था, क्योंकि वहां उनकी अपनी राजनीतिक स्थिति प्रभावित नहीं होती थी, लेकिन संसद में उन्होंने दरवाजे बंद रखे। टीएमसी की भी पोल खुल गई है, जो पार्टी अपने राज्य में महिलाओं की आवाज को हिंसा के जरिए दबाती है, वही संसद में लोकतंत्र की बात कर रही थी। इसलिए इन विधेयकों का विरोध करना वास्तव में महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास है।
महिला-विरोधी ताकतों के खिलाफ मजबूती से लड़ेगी -प्रधानमंत्री मोदी की सरकार
प्रधानमंत्री मोदी की सरकार महिलाओं के अधिकारों के लिए इन महिला-विरोधी ताकतों के खिलाफ मजबूती से लड़ेगी, ताकि देश की आधी आबादी को उसका हक मिल सके। प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना से 60 लाख माताएं लाभान्वित। लिंग-चयन की प्रक्रिया को समाप्त कर, बालिकाओं के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने तथा शिक्षा के माध्यम से बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बेटी बचाओे, बेटी पढ़ाओ योजना का शुभारम्भ किया गया।
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 27.37 लाख बेटियां हो रही लाभान्वित
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 27.37 लाख बेटियां लाभान्वित। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत 9.43 लाख से अधिक समूहों, 64,761 ग्राम संगठनों एवं 3,296 संकुल स्तरीय संघों का गठन करते हुए 1.06 करोड़ से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। पी0एम0 स्वनिधि योजना से 02 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित। बी0सी0 सखी योजनान्तर्गत 39885 बी0सी0सखियों द्वारा कार्य करते हुए रू0 42,711 करोड़ से अधिक का वित्तीय लेन-देन किया गया व रू0 116 करोड का लाभांश अर्जित किया गया। लखपति महिला योजना के अन्तर्गत 35 लाख से अधिक दीदियों का चिन्हांकन किया गया एवं 18.55 लाख से अधिक महिलायें लखपति की श्रेणी में। महिला स्वयं सहायता समूहों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत 2682 उचित मूल्य की दुकानों का आवंटन किया गया। 60000 समूह की महिलाओं के माध्यम से ड्राई राशन का वितरण।
15409 विद्युत सखियों द्वारा रू0 3207 करोड़ का विद्युत बिल कलेक्शन सम्बन्धी किया गया कार्य
15409 विद्युत सखियों द्वारा रू0 3207 करोड़ का विद्युत बिल कलेक्शन सम्बन्धी कार्य किया गया, जिससे विद्युत सखियों को रू0 41.3 करोड़ का कमीशन प्राप्त हुआ। औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नाइट शिफ्ट (शाम 07 बजे से सुबह 06 बज तक) में कार्य करने की अनुमति दी गयी है। वर्ष 2017 में जहां महिला श्रम बल भागीदारी लगभग 13 फीसदी थी, वहीं आज यह बढ़कर लगभग 36 फीसदी तक पहुंच चुकी है।
प्रदेश में महिला सुरक्षा हेतु एण्टी रोमियों स्क्वाड द्वारा चलाया गया अभियान
प्रदेश में महिला सुरक्षा हेतु एण्टी रोमियों स्क्वाड द्वारा अभियान चलाकर 2017 से 2026 तक असामाजिक तत्वों के विरूद्ध 29908 अभियोग पंजीकृत कर, 39334 व्यक्तियों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की गयी। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा एवं सम्मान हेतु ‘‘मिशन शक्ति’’ अभियान चलाया गया। महिला अपराध और अपराधियों के विरूद्ध जीरो टाॅलरेन्स नीति के अन्तर्गत प्रभावी अभियोजन के माध्यम से वर्ष 2017 से 15.01.2026 तक 32801 प्रकरणों में अभियुक्तों को सजा दिलायी गयी।
2017 से अब तक 05 लाख 54 हजार से अधिक बेटियों के सम्पन्न हुए विवाह
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत पारदर्शी संचालन हेतु योजना के पारदर्शी संचालन हेतु योजना का ऑनलाइन साॅफ्टवेयर विकसित कर, इच्छुक व्यक्तियों द्वारा पोर्टल पर आवेदन किया जा रहा है। 2017 से अब तक 05 लाख 54 हजार से अधिक बेटियों के विवाह सम्पन्न हुआ है।
इन प्रमुख लोगों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा आदि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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