Khabarilaal News Desk :

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक वार्ताओं के समानांतर ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के तहत कम से कम तीन दौर की गोपनीय बैठकें आयोजित की गई हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच किसी भी संभावित सैन्य टकराव को नियंत्रित करना और तनाव को बढ़ने से रोकना बताया जा रहा है।

विवाद समाधान नहीं, अब संघर्ष प्रबंधन पर फोकस

सूत्रों के अनुसार, पहले जहां ट्रैक-2 वार्ताओं में जम्मू-कश्मीर, नियंत्रण रेखा (LoC) और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होती थी, वहीं अब फोकस "संघर्ष प्रबंधन" पर शिफ्ट हो गया है। यानी दोनों पक्ष विवादों के समाधान से ज्यादा इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि किसी भी संकट या तनाव की स्थिति को युद्ध में बदलने से कैसे रोका जाए।

तीन दौर की बैठकें हो चुकीं

जानकारी के अनुसार मई 2025 के बाद से भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच कम से कम तीन दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इनमें पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों में आयोजित वार्ताएं शामिल हैं। इसके अलावा वर्ष के अंत तक दो और बैठकों की संभावना जताई जा रही है।

पाकिस्तान सेना की बढ़ी भूमिका

बैठकों में शामिल सूत्रों का कहना है कि हाल के दौर में पाकिस्तान की ओर से ट्रैक-2 प्रक्रिया पर सेना का नियंत्रण पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुआ है। बातचीत में शामिल प्रतिनिधियों, एजेंडा और संदेशों पर सेना की निगरानी बढ़ी है।

दोहा और मस्कट में हुई अहम चर्चा

सबसे हालिया बैठक 2 फरवरी को कतर की राजधानी दोहा में आयोजित हुई थी, जो दो दिनों तक चली। इसमें दोनों देशों के पूर्व राजनयिकों, सैन्य अधिकारियों और रणनीतिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इससे पहले मस्कट और भारत के पूर्वी हिस्से के एक शहर में भी महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गई थीं।

सिंधु जल संधि और कश्मीर मुद्दा एजेंडे में पीछे

रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया बैठकों में सिंधु जल संधि और जम्मू-कश्मीर जैसे पारंपरिक विवादों पर अपेक्षाकृत कम चर्चा हुई। इसके बजाय सीमा पर तनाव कम करने, सैन्य संवाद बढ़ाने और गलतफहमी से पैदा होने वाले संकटों को रोकने के उपायों पर अधिक ध्यान दिया गया।

ट्रैक-2 डिप्लोमेसी क्यों है अहम?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैक-2 डिप्लोमेसी सरकारों के बीच सीधे संवाद न होने की स्थिति में एक वैकल्पिक संचार माध्यम का काम करती है। इससे दोनों देशों को एक-दूसरे की सोच और रणनीतिक दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिलता है, जबकि सरकारें औपचारिक रूप से इन वार्ताओं का हिस्सा नहीं होतीं।

भविष्य में बढ़ सकती हैं ऐसी वार्ताएं

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए आने वाले समय में ट्रैक-2 डिप्लोमेसी भारत-पाक संबंधों में तनाव प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी रह सकती है।

DESK REPORTER – CHANDAN KUMAR

Link Copied to Clipboard!

Comments (0)

9 + 8 = ?
No comments yet. Be the first to share your thoughts!