Khabarilaal News Desk :
वाराणसी में सरकारी आवास के कथित दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निजी कंपनी संचालन के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने लंका थाना पुलिस को 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने दिए जांच के आदेश
वाद पत्र संख्या 1214/2026 पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने हरि प्रभात गुप्ता एवं अन्य के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत प्रारंभिक जांच कराने का आदेश पारित किया।
क्या हैं आरोप?
आवेदक मो. गुफरान सिद्दीकी की ओर से अधिवक्ता सोनू ठाकुर ने न्यायालय को बताया कि बीएचयू परिसर स्थित सरकारी आवास A-13, GTF/FRC के पते का उपयोग कथित रूप से कानपुर की निजी कंपनी Embryo Craft Solutions Private Limited के संचालन के लिए किया जा रहा है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इसके लिए फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और अनुमति पत्र तैयार किए गए तथा संबंधित विभाग को इसकी जानकारी नहीं दी गई।
मारपीट और धमकी के भी आरोप
प्रार्थना पत्र में विपक्षीगण पर गाली-गलौज, मारपीट, धमकी और अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। आवेदक ने मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (AIR 2014 SC 187) के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि धारा 175(3) के तहत आदेश पारित करने से पहले प्रारंभिक जांच कराई जा सकती है।
15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
अदालत ने थानाध्यक्ष लंका, कमिश्नरेट वाराणसी को निर्देश दिया है कि स्वतंत्र गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करें।
अगली सुनवाई 18 जून को
मामले की अगली सुनवाई 18 जून 2026 को निर्धारित की गई है। उसी दिन न्यायालय जांच रिपोर्ट और प्रार्थना पत्र के निस्तारण पर आगे विचार करेगा।
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