WORLD NEWS – ईरान-इजरायल युद्ध पर बड़ा दावा! नवंबर के बाद जंग में कूदेंगे NATO देश?
Khabarilaal News Desk :
पश्चिम एशिया में एक बार फिर ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इसी बीच कथित पूर्व RAW एजेंट और पूर्व NSG कमांडो लकी बिष्ट के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। उन्होंने दावा किया है कि वर्तमान संघर्ष केवल शुरुआत है और आने वाले महीनों में यह युद्ध कहीं अधिक व्यापक और खतरनाक रूप ले सकता है।
‘18 नवंबर 2026 के बाद और विकराल होगा युद्ध’
लकी बिष्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि 18 नवंबर 2026 के बाद ईरान-इजरायल संघर्ष बेहद गंभीर रूप ले सकता है। उनके अनुसार, जो NATO देश अभी तक प्रत्यक्ष रूप से युद्ध से दूर हैं, वे भी खुलकर इसमें शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इसके बाद दुनिया दो बड़े गुटों में बंट सकती है और वैश्विक शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
चीन-ताइवान संघर्ष को लेकर भी बड़ा दावा
लकी बिष्ट ने यह भी दावा किया कि नवंबर 2026 के दौरान चीन और ताइवान के बीच बड़े सैन्य संघर्ष की शुरुआत हो सकती है। उनके अनुसार, यदि ऐसा हुआ तो एशिया का बड़ा हिस्सा अस्थिरता और सैन्य तनाव की चपेट में आ सकता है।
हालांकि इन दावों की किसी सरकारी या आधिकारिक एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
फिर भड़का ईरान-इजरायल तनाव
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने रविवार को इजरायल की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इजरायली सेना का दावा है कि अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया गया।
इसके जवाब में इजरायल ने तेहरान, तबरीज और इस्फहान समेत कई क्षेत्रों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। हमलों के बाद ईरान ने राजधानी तेहरान स्थित इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास का एयरस्पेस बंद कर दिया।
ट्रंप ने ईरान से की बातचीत की अपील
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान से मिसाइल हमले रोकने और वार्ता की मेज पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सैन्य टकराव को बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक समाधान तलाशना जरूरी है।
विशेषज्ञों की राय
रक्षा और सामरिक मामलों के जानकारों का मानना है कि वर्तमान समय में पश्चिम एशिया, यूरोप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि भविष्य में NATO की सीधी भागीदारी या चीन-ताइवान युद्ध जैसे दावों को फिलहाल आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं माना जा सकता।
बढ़ी वैश्विक चिंता
ईरान-इजरायल संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की निगाहें आने वाले महीनों की घटनाओं पर टिकी हैं। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य विस्तार की संभावना अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डाल सकती है।
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